महाराष्ट्र में भी फैली नीपा विषाणु की दहशत

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मुंबई- नीपा वायरस ने देश में हलचल मचा दी है। केरल में हुई 11 लोगों की मृत्यू के बाद सभी राज्य इस नए विषाणु के संक्रमण से बचने के लिए एलर्ट हो गए हैं। इधर महाराष्ट्र में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें नीपी के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत का दावा है कि राज्य में नीपा वायरस का एक भी मरीज नहीं पाया गया है। इस विषाणु की राज्य में संक्रमित होने की परिस्थिति नहीं है। बावजूद इसके बीमारी से सतर्क रहने की जरूरत है, बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करने की अपील की गई है।
– राज्य में एक भी मरीज नहीं, पंरतु सभी अस्पतालों को सतर्क रहने की सूचना –
मंत्रालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सावंत ने बताया कि राज्य में भले ही एक भी मरीज नहीं मिला है, लेकिन सभी सरकारी अस्पतालों को सतर्क रहने की सूचना दे दी गई है। मुंबई के कस्तूरबा सहित सभी प्रमुख अस्पतालों में इसके लिए विशेष वार्ड शुरू करने की सूचना दी गई है। मंत्रालय में सावंत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक में हुई चर्चा के बाद निपाह विषाणु से बचने के लिए उपाय योजना सुनिश्चित की गई।  सावंत ने बताया कि राज्य में एक भी मरीज नहीं पाया गया है। फिर भी सभी सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों, जिला परिषदों के सीईओ, मनपा आयुक्तों, जिला शल्यचिकित्सक को सूचित कर दिया गया है। अस्पतालों को उपाय योजना की मार्गदर्शिका कॉपी भी भेजी गई है। लोगों को भी सतर्क रहने कहा गया है। साथ ही अपील की गई है कि लोग केरल के कोझीकोडे जिले और व अन्य परिसर में जाने से बचें। केरल से आनेवाले लोगों पर नजर रखी जाए। बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. प्रदीप व्यास, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के आयुक्त डॉ. संजीवकुमार, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. संजीव कांबले, संसर्गजन्य रोग प्रतिबंधक समिति के सदस्य डॉ. ओम श्रीवास्तव, अतिरिक्त अभियान निदेशक डॉ. सतीश पवार आदि मौजूद थे।
क्या है नीपा वायरस
केरल में अभी तक 11 लोगों की मौत हुई है। बीमारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी गई है। नीपा वायरस सबसे पहले 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में पाया गया था। वर्ष 2004 में इस वायरस की वजह से बांग्लादेश में काफी लोग प्रभावित हुए थे। सबसे पहले इस विषाणु के लक्षण घरेलु सुअरों में पाए गए थे। इसके बाद घोड़ा, बकरी, कुत्ते, बिल्ली, भेड़ जैसे पालतू प्राणियों में फैला। नीपा वायरस इन्सेफलाइटिस को फैलाने वाला आरएनए या रिबोन्यूक्लिक एसिड वायरस पैरामाइक्सोविरिडे, जीनस हेनिपावायरस प्रजाति का होता है। यह हेन्ड्रा वायरस से संबंधित है जो घोड़ों और मनुष्यों के वायरल सांस संक्रमण से संबंधित होता है।
बीमारी के लक्षण 
तेज संक्रमण बुखार, उल्टी, बदन दर्द, सिरदर्द, बेचैनी, सांस फूलना, मानसिक भ्रम, बेहोशी, कोमा आदि बीमारी के लक्षण हैं। नीपा विषाणु का अभी तक कारगर इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया तो मरीज की मृत्यू हो सकती है। पेड़ से गिरे अथवा जूठे फल नहीं खाना चाहिए। खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। नीपा वायरस से संक्रमित एक इंसान से दूसरे इंसान में यह बीमारी फैलती है। बीमार जानवरों से दूर रहना चाहिए।
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