नौरादेही में फिर आबाद होंगे बाघ

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भोपाल, जबलपुर से 140 किलोमीटर दूर सागर-दमोह नरसिंहपुर जिलों में फैले नौरादेही अभयारण्य में अप्रैल के चौथे सप्ताह में कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बाघिन शिफ्ट की जा रही है। बहुत पहले कभी यहाँ बाघ हुआ करते थे, पर वर्तमान में यह पहली बाघिन होगी।

नौरादेही में कान्हा से बाघिन, सतपुड़ा से हाथी और पन्ना से प्रशिक्षित स्टाफ की मदद ली जाएगी। बाघिन को कान्हा प्रबंधन ने अनाथ शावक के रूप में पाला है। आज दो साल 5 माह की हो चुकी बाघिन जंगल में विचरण और शिकार के लिए पूर्णरूपेण सक्षम है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री जितेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि भविष्य में यहाँ बाघ की अधिकता वाले स्थानों से भी बाघ छोड़े जायेंगे। इससे प्रदेश के नये वन क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ेगी और अधिकता वाले स्थानों में टेरिटेरी बनाने को लेकर होने वाली वर्चस्व की लड़ाई और मानव द्वंद में भी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि नौरादेही में कान्हा से बाघिन, सतपुड़ा से हाथी और पन्ना से प्रशिक्षित स्टाफ की मदद ली जाएगी। बाघिन को कान्हा प्रबंधन ने अनाथ शावक के रूप में पाला है। आज दो साल 5 माह की हो चुकी बाघिन जंगल में विचरण और शिकार के लिए पूर्णरूपेण सक्षम है।

वन मंडलाधिकारी नौरादेही ने बताया कि बाघिन के आगमन को लेकर अभयारण्य के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय लोग काफी उत्साहित हैं। बाघिन को हर तरह से अनुकूल वातावरण देने के लिये सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। बाघिन को बमनेर नदी के पास छोड़ा जाएगा, जहां उत्तम छाया, जल और भरपूर शिकार उपलब्ध रहेगा। अभयारण्य के बीचों-बीच 23 किलोमीटर बहने वाली नदी यहां की लाइफ लाइन है। बाघिन की देखभाल और निगरानी के लिए विभिन्न चरणों में स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। ऐहतियातन पन्ना टाइगर प्रबंधन द्वारा शुरूआती निगरानी की जाएगी।

7-8 अप्रैल को देवास के खिवनी अभयारण्य में पक्षी गणना

देवास के खिवनी अभयारण्य में 7-8 अप्रैल को बर्ड सर्वे-2018 आयोजित किया जायेगा। वाइल्ड लाइफ एण्ड नेचर कंज़रवेन्सी, बर्ड काउन्ट इंडिया और खिवनी अभयारण्य द्वारा संयुक्त रूप से होने वाली पक्षी गणना के लिये स्वयंसेवकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गये हैं।

वन मंडलाधिकारी देवास ने बताया कि अब तक 30 प्रतिभागियों के आवेदन प्राप्त हो गये हैं। प्रतिभागियों को ग्रुप के रूप में केम्प आवंटित किये जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन सुबह क्षेत्र का भ्रमण कर पक्षी गणना की जाएगी। प्रतिभागी अपने रिपोर्ट 8 अप्रैल को दोपहर बाद प्रस्तुत करेंगे। अभयारण्य में स्थित वन, वन्य प्राणी और पक्षियों की जानकारी प्रबंध योजना और अभयारण्य में टूरिज्म हाट-स्पॉट तैयार करने में बर्ड सर्वे-2018 की अह्म भूमिका होगी।

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