नौरादेही अभयारण्य में मिली 150 से अधिक पक्षी प्रजाति

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भोपाल, नौरादेही वन्य प्राणी अभयारण्य में सिटीजन फॉर नेचर एण्ड कन्जरवेशन जबलपुर एवं नौरादेही वन्य प्राणी अभयारण्य, वन मंडल सागर के संयुक्त तत्ववाधान में पक्षियों की गणना की गई है। इसमें 3 जिलों के 1200 किलोमीटर क्षेत्र में फैले अभयारण्य में 150 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ मिली हैं।

प्रमुख प्रजातियों में डस्की ईगल आउल, पेंटेड सैडग्राउज पहली बार देखे गये और गिद्दों की तीन प्रजातियाँ इंडियन पिट्टा, किंग वल्चर, इंडियन वल्चर मिली.

इनमें डस्की ईगल आउल, पेंटेड सैडग्राउज पहली बार देखे गये और गिद्दों की तीन प्रजातियाँ इंडियन पिट्टा, किंग वल्चर, इंडियन वल्चर मिली। बाकी पक्षियों में सिनेरस टीट, मोर, ग्रीन सैंडपाइपर, क्रेस्टेड ट्रीस्विफ्ट, क्रेस्टेट बंटिन्ग, सल्फर बेलीड वॉब्लर, पेंटेड स्टॉर्क, यूरेशियन, डार्टर, ब्राऊनफिश आउल, बोनिलीईगल, ओरियन्टल हनीबजार्ड आदि भी देखे गये।

केन्द्रीय सुरक्षा ऑडिट टीम ने की सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की प्रशंसा

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 3 दिवसीय निरीक्षण के लिये आयी केन्द्रीय सुरक्षा ऑडिट टीम ने रिजर्व की व्यवस्थाओं और गतिविधियों की प्रशंसा की है। कर्नाटक के पूर्व मुख्य वन्य-प्राणी अभिरक्षक श्री बी.के. सिंह के नेतृत्व में 2 दलों ने तीन दिन तक टाइगर रिजर्व का सघन भ्रमण किया। क्षेत्र संचालक श्री एल. कृष्णमूर्ति द्वारा प्रेजेंटेशन के बाद दल ने 70 पेट्रोलिंग कैम्प और 10 रेंज कार्यालयों का निरीक्षण किया। टीम में एक विदेशी विशेषज्ञ भी शामिल था।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) श्री जितेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि ऑडिट टीम ने 42 गाँव के पुनर्स्थापन और उनसे संबंधित 4000 विकास कार्यों की भी प्रशंसा की। रिजर्व प्रबंधन खाली गाँव में पिछले दो सालों से चारा विकास के कार्य कर रहा है। भरपूर चारा मिलने से शाकाहारी प्राणियों की संख्या में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसका सीधा लाभ बाघ, तेंदुआ आदि मांसाहारी वन्य-प्राणियों को मिलने लगा है।

वन्य प्राणी अपराध प्रकरणों का अब होगा त्वरित निराकरण

इसबीच, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने वन्य प्राणी अपराधों से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये न्यायाधीशों को दिये जाने वाले यूनिट में संशोधन किया है। अब वन अपराध प्रकरणों के निराकरण के लिये संबंधित न्यायाधीश को 3 के स्थान पर 4 और वन्य प्राणी अपराध प्रकरण के निराकरण पर 3 के स्थान पर 6 यूनिट मिलेंगे। इससे वन्य प्राणी अपराध प्रकरणों का जल्दी निराकरण होगा।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री जितेन्द्र अग्रवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये न्यायधीशों को यूनिट (अंक) देने का प्रावधान है। उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न प्रकार के अपराधिक प्रकरणों के निराकरण पर जज को दो से 16 अंक तक देने का प्रावधान है।

अभी तक वन और वन्य प्राणी अपराध निराकरण करने पर जज को 3-3 यूनिट मिलती थीं। वन विभाग द्वारा की गई पहल से अब वन अपराध निराकरण होने पर 3 के स्थान पर 4 और वन्य प्राणी अपराध प्रकरण का निराकरण होने पर दोगुने अर्थात् 6 यूनिट प्राप्त होंगे। श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये वन विभाग ने उच्च न्यायालय से इसकी अनुशंसा की थी।

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