बिजली कटौती पर बढ़ी रार, उर्जा मंत्री बावनकुले को हटाने की मांग 

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मुंबई- कोयले की कमी का असर महाराष्ट्र में पड़ रहा है। बिजली कटौती के कारण जनता परेशान है। इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार पर साजिश का गंभीर आरोप लगाया है। एनसीपी ने उर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को जिम्मेदार ठहराते हुए, उन्हें तत्काल मंत्री पद से हटाने की मांग की है।

चुनाव के कारण महाराष्ट्र का कोयला राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ को – नवाब मलिक

पार्टी प्रदेश मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि चुनाव को देखते हुए महाराष्ट्र के हिस्से का कोयला राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ को दिया जा रहा है। जिसके कारण महाराष्ट्र में बिजली उत्पादन में कमी आने से बिजली की समस्या निर्माण हुई है। महाराष्ट्र को मुश्किलों में लाने का  षडयंत्र भाजपा ने रचा है। मलिक ने आरोप लगाया कि राज्य के उर्जा मंत्री बावनकुले का बिजली विभाग में ठेका है। उर्जा विभाग की चार कंपनियों के सलाहकार  विश्वास पाठक अनुभवहीन हैं। उन्होंने राज्य को दिवालिया बना दिया है। पाठक और उर्जा मंत्री बावनकुले को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।
मलिक के मुताबिक राज्य में 11 से 12 घंटे अघोषित बिजली कटौती जारी है। राज्य के उर्जा विभाग द्वारा जारी इंटरनल नोट में 20 प्रतिशत बिजली मांग बढ़ने का उल्लेख है। यदि 3 हजार मेगावाट की टूट थी तो संबंधित नोट घोषित की जानी चाहिए थी। मलिक ने कहा कि राज्य को प्रतिदिन 32 रेक कोयला की जरूरत होती है। परंतु 16 रेक कोयला मिल रहा है। कोयले की आपूर्ति होलइंडिया और उसकी उप कंपनियों के माध्यम से होती है। बिजली की कमी जान बूझकर राजनीतिक फायदे के लिए गई है। मलिक ने कहा कि केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल बार-बार कहते रहे हैं कि देश में कोयले की कमी नहीं है। फिर राज्य के हिस्से का कोयला क्यों नहीं मिल रहा है। इसका जवाब केंद्रीय मंत्री को देना चाहिए। 
 
रेलवे में रेक की उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए मलिक ने कहा कि इसका प्रबंधन गोयल को करना चाहिए, क्योंकि कोयला मंत्री के साथ वे रेल मंत्री भी हैं। महाराष्ट्र के हिस्से का कोयला राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को दिया जा रहा है, ताकि चुनाव जीता जा सके। उड़ीसा की महागुज मायनिंग लिमिटेड का मसला उठाते हुए मलिक ने कहा कि महागुज की माइनिंग अडानी और निजी कंपनियों को देने की साजिश मोदी सरकार ने रची है।
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