निरंजन डावखरे ने छोड़ी एनसीपी, भाजपा में होंगे शामिल 

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मुंबई- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के निरंजन डावखरे ने एमएलसी के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिती में गुरुवार को भाजपा में शामिल होंगे। इधर एनसीपी ने निरंजन को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित करने की घोषणा की है। 
निरंजन ने कहा है कि उन्होंने  पिता दिवंगत वसंत डावखरे के साथ एनसीपी के उतार-चढ़ाव करीब से देखे है। एनसीपी उन्हें परिवार जैसी लगती थी, पार्टी छोड़ते हुए उन्हें दुख हो रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठन में अंदरूनी कलह से परेशान होकर वे एनसीपी छोड़ रहे हैं।
 
निरंजन कोकण स्नातक सीट से एनसीपी के एमएलसी थे। उनका कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है। बुधवार को उन्होंने एनसीपी छोड़ने के साथ ही एमएलसी का इस्तीफा देकर राज्य की सियासत में हलचल मचा दी। गुरुवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उनके भाजपा में शामिल होने की अधिकृत घोषणा की जाएगी। निरंजन ने कहा है कि उन्होंने  पिता दिवंगत वसंत डावखरे के साथ एनसीपी के उतार-चढ़ाव करीब से देखे है। एनसीपी उन्हें परिवार जैसी लगती थी, पार्टी छोड़ते हुए उन्हें दुख हो रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठन में अंदरूनी कलह से परेशान होकर वे एनसीपी छोड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर एक खेमा लगातार डावखरे परिवार के खिलाफ काम कर रहा था। इस गुट ने वर्ष 2016 में भी विधान परिषद  चुनाव में उनके पिता व उपसभापति वसंत डावखरे के खिलाफ साजिश रची थी। विरोधियों के खिलाफ कोई संगठनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। मौजूदा समय में उन्हें पार्टी से नजरअंदाज किया जा रहा था।  निरंजन ने विधान परिषद के सभापति रामराजे निंबालकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। साथ ही पार्टी की प्राथमिकता सदस्यता का इस्तीफा उन्होंने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटिल के पास भेजा है। निरंजन कोकण स्नातक सीट से वर्ष 2012 में चुनाव जीते थे। कई दिनों से राजनीतिक गलियारे में सुगबुगाहट थी कि वे जल्द पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
एनसीपी ने निरंजन को पार्टी से छह साल के लिए पार्टी से निलंबित करने की घोषणा की है। एनसीपी महासचिव शिवाजीराव गर्जे के मुताबिक निरंजन को एमएलसी ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी और युवक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। संगठन में कई अवसर देने के बाद भी निरंजन पार्टी छोड़कर दूसरे दल में शामिल होने जा रहे हैं। निरंजन की अवसरवादिता को देखते हुए भविष्य में उस दल भी कभी झटका लग सकता है। गर्जे के अनुसार एनसीपी ने निरंजन और उनके पिता दोनों को एक साथ विधायक बनाया था। दिवंगत वसंत डावखरे को विधान परिषद का उपसभापति और उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी एनसीपी ने दी थी। संकट के दिनों में भी पार्टी डावखरे के साथ खड़ी रही। यैसे में परिवार के साथ अन्याय किए जाने के आरोपों में कोई दम नहीं है।
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