NOD: यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों के ख़िलाफ़ कारगर सुरक्षा

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पुरुषों के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के झूठे मामले बढ़े, मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने जताई थी चिंता।

जज ने कहा 100 में 48 से ज़्यादा दायर केस झूठे।

ऐसे आरोपों से व्यक्ति की साख होती है ख़राब।

झूठे केस से नौकरी, पैसा और समय का नुक़सान तो होता ही है, साथ ही मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

पूरे परिवार को समाज में अपमान झेलना पड़ता है, केस में फँसे व्यक्ति के बच्चों पर भी मानसिक दबाव पड़ता है।

अगर आप सफल हैं, अमीर हैं, बड़े पद पर हैं, तो आपको सतर्क रहने की ज़रूरत है।

आप पर कभी भी ये स्वार्थी और अवसरवादी औरतें हमला कर सकती है, और आप जेल जा सकते हैं।

धारा 354 आपकी नौकरी छीन सकती है, आपकी दौलत पर भी झाड़ू फेर सकती है।

और इससे बचने का कारगर उपाए है: ‘NOD’ (No Offence Declaration)

“नॉड” वरिष्ठ वकीलों द्वारा तैय्यार किया एक पुख़्ता क़ानूनी डिक्लरेशन फ़ार्म है, ‘नॉड’, झूठे मुक़दमों से आपकी रक्षा कर सकता है।

ऑफ़िस में आने वाली हर महिला से इस फ़ार्म पर साइन कराएँ।

Watch Full Story on YouTube:
https://youtu.be/bWFRz3hLDIs

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