एक करोड़ से अधिक कारोबारियों का जीएसटी रिटर्न भरना मुश्किल

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मुंबई। खुदरा व्यापारियों के राष्ट्रीय संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने  केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र भेजकर जीएसटी की वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च 2019  करने की मांग की है।

जीएसटी की वार्षिक रिटर्न  की तारीख बढ़ाने की मांग 

कैट के पत्र में कहा गया है कि अभी तक जीएसटी पोर्टल पर वार्षिक रिटर्न दाखिल करने का प्रारूप अथवा विकल्प आया ही नहीं है। जिसके चलते देश भर में जीएसटी पोर्टल से पंजीकृत 1 करोड़ से अधिक कारोबारियों का रिटर्न भरना मुश्किल है । जीएसटी का वार्षिक रिटर्न दाखिल करने बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस रिटर्न को दाखिल करते समय संबंधित वर्ष की पूर्व में भरी हुई रिटर्न को संशोधित करने का यह आखिरी विकल्प है ।
वैट अथवा बिक्री कर में वार्षिक रिटर्न भरने का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए बड़ी संख्यां में देशभर में व्यापारियों को अभी यह जानकारी नहीं है कि उन्हें वार्षिक रिटर्न भी भरनी है। अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग करते हुए कैट ने वित्त मंत्री को सुझाव दिया है अविलंब वार्षिक रिटर्न का फॉर्मेट एवं उससे संबंधित प्रक्रिया को जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। दूसरी ओर सरकार इस बारे में एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान चलाए, जिससे लोगों को वार्षिक रिटर्न भरने के बारे में जानकारी दी जाए । कैट के अनुसार इस मुद्दे पर देश भर के व्यापारी सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया व राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक जीएसटी लागू होने का 2017 -18 पहला वर्ष है। जीएसटी से संबंधित अनेक विषयों से देशभर के व्यापारी अनभिज्ञ है । व्यापारियों को यह मालूम ही नहीं है की वार्षिक रिटर्न उनके लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं। यदि यह रिटर्न नहीं भरा गया तो उसके क्या परिणाम होंगे। एक तरफ इस रिटर्न के द्वारा व्यापारी अपना रिटर्न संशोधित कर सकते हैं, जिससे उन्हें इनपुट क्रेडिट की हानि न हो और उन पर टैक्रस की कोई बकायेदारी न आ जाए।  इसलिए जीएसटी की वार्षिक रिटर्न भरना प्रत्येक व्यापारी के लिए महत्वपूर्ण और जरूरी है।
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