विपक्ष ने लगाया सरकार पर किसानों के साथ वादा खिलाफी का आरोप 

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मुंबई- एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है भाजपा  सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। पिछले चार साल में  किसानों से किए गए किसी वादे को पूरा नहीं किया  गया है। भाजपा चुनाव जीतने के लिए साम,दम, दंड, भेद का इस्तेमाल कर रही है, अब उचित समय आ गया है कि सभी दल एकजुट हो जाएं। इधर नागपुर में एक किसान की मौत और अमरावती में किसानों के उग्र आंदोलन के सबंध में कांग्रेस ने चेताया है यदि सरकार जल्द होश में नहीं आई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
पवार ने कहा कि हमारी पार्टी किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है। भाजपा शासनकाल में किसानों की हालत ज्यादा खराब हुई है। किसान कर्ज के बोझ के तले दबे हुए हैं। जिसके कारण खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं। 
भंडारा गोंदिया संसदीय से सीट से एनसीपी के विजयी उम्मीदावर मधुकर कुकडे ने सोमवार को सिल्वर ओक बंगले में पवार से मुलाकात की इस अवसर पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुप्रिया सुले सहित अन्य नेता मौजूद थे। इस दौरान पवार ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। पवार ने कहा कि हमारी पार्टी किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है। भाजपा शासनकाल में किसानों की हालत ज्यादा खराब हुई है। किसान कर्ज के बोझ के तले दबे हुए हैं। जिसके कारण खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं।  सभी विपक्षी पार्टियों को किसानों का समर्थन करना चाहिए । पवार ने कहा कि चुनाव से पहले मोदी ने  किसानों को उत्पादन खर्च पर 50 प्रतिशत लाभ देने का वादा किया था, परंतु उसे पूरा नहीं किया। राज्य सरकार के कर्जमाफी का लाभ किसानों को नहीं मिला है। पवार के मुताबिक किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है। पवार ने किसानों से अपील की है वे दूध और सब्जियां रास्ते पर न फेंके। उसे गरीबों में बांट दें। जरूरतमंदों को सब्जी व दूध मिलेगा तो किसानों दुआ मिलेगी। किसान ख्याल रखें कि उनके आंदोलन से आम लोगों को परेशानी नहीं हो ।
विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा है सरकार किसानों के साथ ज्यादती कर रही है। सरकार को जल्द इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। नागपुर में आंदोलन के दौरान एक किसान की मृत्यू और अमरावती में हुए तीव्र आंदोलन के संबंध में विखे पाटिल ने कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन को जान बूझकर दुर्लिक्षत कर रही है। किसान शरद खेडीकर के मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है। विखे पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी मन की बात में किसानों को दाल के खेती करने की अपील कर रहे थे। दाल का प्रत्येक दाना खरीदने का वादा पीएम ने किया था। पंरतु सरकारी खरीदी की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी राज्य में नाफेड में पंजीकरण करा चुका 2 लाख 65 हजार किसानों में से 1 लाख 92 हजार किसानों की तकरीबन 25 लाख कुंतल तुवर पड़ी हुई है।  नाफेड ने 45 लाख कुंतल तुअर खरीदी का लक्ष्य रखा था। परंतु सरकार ने केवल 33 लाख कुंतल तुअर की खरीदी की है। तुअर खरीदी का पैसा भी सरकार अभी तक किसानों को नहीं दे सकी है। चना और सोयाबीन जैसी सभी उपज की खरीदी में सरकार ने लापरवाही दिखाई है। हाल में हुई बे-मौसम बारिश से खुले पड़े अनाज भीग जाने से किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। अमरावती में सोमवार को निकाले गए मोर्चे से एक सप्ताह पहले किसानों ने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए शांति मोर्चा निकाला था। समस्या का हल नहीं निकाला तो बड़ा आंदोलन छेड़ने का इशारा दिया गया था। एक किसान ने आत्मदाह करने की कोशिश भी की थी। परंतु सरकार नींद से जगने के लिए तैयार नहीं है। सरकार ‘सेल्फी विथ फार्मर्स’ जैसे ‘स्टंट’ में व्यस्त है।
शरद पवार की नीयत खोटी -भाजपा 
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के उस बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने आंदोलनकारी किसानों को निर्णायक भूमिका लेने की सलाह दी है। वित्त मंत्री सुधीर मुनंगटीवार सहित राज्य कृषिमूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल ने पवार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है यह किसानों की बलि लेने का प्रयास है। पाशा पटेल ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याएं सुझाने के बजाए उनके वोटों पर सत्ता स्थापित करना और जमीन हड़पने का काम ही शरद पवार और उनके सहयोगियों ने किया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल के मुताबिक पवार की नीयत खोटी है। वे दस साल तक देश के केंद्रीय कृषि मंत्री रहे। लेकिन किसानों की समस्याएं सुलझाने के बजाए, उनका ध्यान क्रिकेट पर ज्यादा था। आईपीएल में गुथे पवार सत्ता जाने के बाद निराशा में किसानों को भड़काने का घिनौना काम कर रहे हैं। मौजूदा सरकार की नीयत का माप-तौल करने से पहले, इतने साल तक किसानों के नाम पर सत्ता सुख भोगानेवाले पवार बताएं कि किसान बेहाल क्यों हुए।
पी. साईनाथ द्वारा जारी की गई जानकारी के हवाले से पाशा पटेल ने बताया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने से पहले वर्ष 2013 में 3,146 किसानों ने आत्महत्या की थी। वर्ष 2004 से 2013 तक हर साल 3,685 किसानों ने आत्महत्या की अर्थात एक दशक में प्रतिदिन 10 किसान खुदकुशी कर रहे थे। पवार के कृषि मंत्री बनने के बाद यानि वर्ष 2004 के बाद राज्य के किसानों की स्थिती और भी दयनीय हो गई। पवार करीब 50 साल तक सत्ता में रहे। वे चार बार मुख्यमंत्री और दस सला
तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहे। पंद्रह साल तक उनकी पार्टी की गठबंधन की सरकार रही। इस कालावधि में किसानों के कल्याण के लिए कारगर योजना नहीं बनाई गई, जिसके कारण किसान आज सड़क पर उतरे हैं।
पटेल के मुताबिक पंचायत से लेकर संसद तक जनता ने पवार को नाकार दिया है। किसानों को भड़काकर पवार फिर से राजनीतक कद बढ़ाने की कोशिश में हैं। मोदी और फडणवीस सरकार की नीयत साफ है। किसानों की समस्याएं पिछली सरकार के पाप हैं, जिसका हल निकालने का प्रयास मौजूदा सरकार ने किए हैं। कर्जमाफी और किसानों को केंद्र की ओर से दी गई सबसे ज्यादा मदद इसके उदाहरण हैं।
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