#PadmavatiControversy: New Twist In The Already Twisted Tail!

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पद्मावत फिर भँवर में

मुंबई,  संजय लीला भंसाली की फ़िल्म पद्मावती उर्फ़पद्मावतका विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक तरफ़ जहाँ राजस्थान और मध्यप्रदेश की सरकारों ने बैन नहीं हटाने का फ़ासला बरक़रार रखा है वहीं उत्तर प्रदेश ने उदारता का परिचय दिया है। सेंसर बोर्ड द्वारा कुछ सुधार और छँटनी के बाद पद्मावत की रलीसे को हरी झंडी दिखा दी थी। मगर अचानक भाजपा सरकार के एक अहम घटक के अहम मंत्री ने इस सारे मामले को फिर उलझा दिया है।

एक तरह से देखा जाए तो पहल अच्छी है मगर तरीक़ा ग़लत है। अब देखना ये है कि २५ तारीख़ को फ़िल्म रिलीज़ हो भी पाती है या नहीं।

मज़े की बात ये हैं की ये मंत्री महोदय ना राजपूत हैं और ना ही राजस्थान के हैं। फिर इनके इस विवाद में कूदने और घोषणा करने की कथित तौर पर विवादिद दृश्य को हटाए बिना फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने देंगे। ये वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं। और बिना मतलब और बिना सोचे समझे ये क़दम उठाने का उनका कोईराजनीतिक औचित्यनहीं बनता।

श्री रामदास आठवले जो की केंद्र में सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता राज्य मंत्री हैं, ने हाल ही में ये घोषणा की थी। श्री आठवले के इस  कदम को हाल ही में महाराष्ट्र में हुए पिछड़ीजाती के लोगों के विद्रोह और दंगे के परिपेक्ष्य में देखें तो बात साफ़ हो जाती है। श्री आठवले ने पद्मावती फ़िल्म के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे राजपूत और मराठा गुटों का समर्थन कर के जातीय तनाव काम कर दिया है।

एक तरह से देखा जाए तो पहल अच्छी है मगर तरीक़ा ग़लत है। अब देखना ये है कि २५ तारीख़ को फ़िल्म रिलीज़ हो भी पाती है या नहीं। क्योंकि श्री आठवले के विरोध का परिणाम कुछ भी हो सकता है। पिछड़ीजाती की शक्ती का एक ट्रेलर हाल ही में हम सब देख चुके हैं। संजय लीला भंसाली को शुभ कामनाएँ और बधाई।

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