केंद्रीय राजनीति में जाना चाहती हैं पंकजा मुंडे

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मुंबई। महाराष्ट्र की महिला व बाल कल्याण मंत्री और पूर्व भाजपा नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की पुत्री पंकजा मुंडे केंद्रीय राजनीति में जाने की इच्छुक हैं। उन्होंने सोमवार को मंत्रालय में प्रेस वार्ता के दौरान अपनी यह इच्छा व्यक्त की। 

ओबीसी को ठेस न पहुंचाते हुए मराठा समुदाय को आरक्षण देने के पक्ष में

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे केंद्रीय राजनीति में जाना चाहेंगी, तब पंकजा ने स्पष्ट  किया कि उनकी दिली इच्छा है कि वह केंद्र में काम करें। यदि उन्हें पार्टी केंद्र की जिम्मेदारी सौंपती हैं तो वे उसे सहर्ष स्वीकार करेंगी। बहरहाल यह पार्टी पर निर्भर करता है कि उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी।  मराठा आरक्षण पर बोलते हुए पंकजा ने कहा कि वे मराठा आरक्षण के पक्ष में हैं। ओबीसी आरक्षण को ठेस न पहुंचाते हुए मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने भी यही निर्णय लिया है। जो स्वागत योग्य हैं। 

पंकजा ने बताया कि इस वर्ष महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी का आयोजन मुंबई के बांद्रा स्थित एमएमआरडीए ग्राउंड में होगा, जिसका उद्घाटन राज्यपाल सी विद्यासागर राव 23 जनवरी 2019 को यानी बुधवार को करेंगे। इस प्रदर्शनी में राज्य के ग्रामीण अंचलों के महिला बचत समूहों द्वारा बनाई गई वस्तुएं, खाद्य पदार्थ व उत्पादों को शामिल किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 23 जनवरी 2019 से 4 फरवरी 2019 तक चलेगी। सरकार का मकसद है कि स्वयं सहायक समूहों को बड़ा बाजार उपलब्ध हो सके। इस प्रदर्शनी में 511 दुकानें लगेंगी, जिसमें से 70 दुकानें खाद्य पदार्थो की होंगी। इसमें राज्य के 29 जिलों के स्वयं सहायक समूह और ग्रामीण कारीगर हिस्सा लेंगे। हर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें हरिहरन, साधना सरगम, अनुप जलोटा, उदित नारायण और अशोक हांडे जैसे संगीतकारों का कार्यक्रम होगा।  

पंकजा ने बताया कि मौजूदा समय में ग्रामीण इलाकों में गरीबी निर्मूलन के लिए महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान पर अमल किया जा रहा है। इस अभियान के तहत राज्य के 26 जिले व 254 तहसीलों में इन्टेन्सिव पद्धति और शेष तहसीलों में नॉान व सेमी इन्टेन्सिव प्रणाली से काम किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अब तक 3.50 लाख स्वयं सहायता समूहों की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से 39 लाख परिवारों को जोड़ा गया है। तकरीबन 555 करोड़ रुपए समुदाय निधि और बैंकों के मार्फत 4150 करोड़ रुपए का ऋण समूहों को उपलब्ध कराया गया है। इस अभियान से 5.50 लाख परिवारों ने उपजीविका के लिए विभिन्न स्त्रोत निर्माण किए हैं, जिससे 550 करोड़ रुपए की आय निर्माण हुई है।


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