प्लास्टिक पाबंदी: हाईकोर्ट का स्थगन देने से इनकार 

Download PDF
मुंबई- प्लास्टिक और थर्माकोल पर पाबंदी लगाने के राज्य सरकार के फैसले में नया मोड़ आ गया है। बांबे हाईकोर्ट ने प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने के राज्य सरकार के निर्णय पर स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि निर्धारित तारीख तक प्लास्टिक प्रतिबंध कानून के तहत किसी पर भी कार्रवाई न की जाए।
प्रदेश भर के प्लास्टिक उत्पाद संगठनों और वितरकों ने प्लास्टिक प्रतिबंध के निर्णय के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। संगठनों का आरोप है कि निर्णय लेने से पहले सरकार ने प्लास्टिक कारोबारियों को विश्वास में नहीं लिया। राज्य सरकार के फैसले से लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने बोतल की मोटाई, चौड़ाई और माइक्रोन के संबंध में कोई मापदंड तय नहीं किया है। सरकार कम से कम तीन महीने तक अपने फैसले पर स्थगन आदेश दे और प्लास्टिक कारोबारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करे।
हाई कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार अपने प्रावधानों के अनुसार उपभोक्ता, वितरक और उत्पादक जैसें घटको के पास मौजूद तीन महीने का प्लास्टिक का भंडार प्रशासन के पास जमा कराए। इसीतरह जनता के पास मौजूद प्लास्टिक का भंडारण स्थानीय प्रशासन के पास जमा कराया जाना चाहिए।
प्लास्टिक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने पर पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इसीतरह जल निकासी और गटर में जाम की समस्या निर्माण होती है। भविष्य की पर्यावरण संबंधी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया है। प्लास्टिक पर पाबंदी लागने के संबंध में शनिवार को अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
प्रदेश भर के प्लास्टिक उत्पाद संगठनों और वितरकों ने प्लास्टिक प्रतिबंध के निर्णय के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। संगठनों का आरोप है कि निर्णय लेने से पहले सरकार ने प्लास्टिक कारोबारियों को विश्वास में नहीं लिया। राज्य सरकार के फैसले से लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने बोतल की मोटाई, चौड़ाई और माइक्रोन के संबंध में कोई मापदंड तय नहीं किया है। सरकार कम से कम तीन महीने तक अपने फैसले पर स्थगन आदेश दे और प्लास्टिक कारोबारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करे।
राज्य सरकार ने प्लास्टिक और थर्माकोल पर प्रतिबंध की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्लास्टिक कारोबारियों ने विरोध जताते हुए सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार ने प्लास्टिक प्रतिबंध के लिए कारोबारियों को तीन महीने का समय भी दिया है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई है कि दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो प्रतिबंध का क्या महत्व होगा। नदी, नाले और समुद्र जैसे कई इलाकों में प्लास्टिक बोतलों का प्रदुषण बढ़ जाएगा।  इससे पहले गुरुवार को प्लास्टिक प्रतिबंध के विरोध में काफी संख्या में लोग काले कपड़े और सिर पर काली पट्टी बांध कर कोर्ट परिसर में पहुंचे थे। जिस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा कि कोर्ट आंदोलन का स्थान नहीं है। अदालत की गरिमा का सम्मान रखा जाना चाहिए।
Download PDF

Related Post