महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू, ढ़ाई सौ इंस्पेक्टर नियुक्त

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मुंबई- राज्य में प्लास्टिक व थर्माकोल से बनाए जाने वाले उत्पादों  के इस्तेमाल पर शनिवार से प्रतिबंध लागू हो जाएगा। इस आशय की अधिसूचना महाराष्ट्र सरकार ने जारी कर दी है। राज्य सरकार ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटने का निर्णय लिया है।

प्लास्टिक थैली के साथ पकड़े गए, तो पांच हजार जुर्माना  

यदि कोई दुकानदार अथवा नागरिक प्लास्टिक की थैली की उपयोग करते पकड़ा जाएगा तो उससे पांच हजार रुपए दंड वसूला जाएगा। प्लास्टिक बैन को सख्ती से लागू करने के लिए बीएमसी ने करीब ढ़ाई सौ इंस्पेक्टर नियुक्त किए हैं। देश में पहली बार पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इतना बड़ा कदम उठाया गया है।
नियम का पलान न करनेवालों को तीन महीने की जेल और  25 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई दुकानदार अथवा नागरिक प्लास्टिक की थैली की उपयोग करते पकड़ा जाएगा तो उससे पांच हजार रुपए दंड वसूला जाएगा। प्लास्टिक बैन को सख्ती से लागू करने के लिए बीएमसी ने करीब ढ़ाई सौ इंस्पेक्टर नियुक्त किए हैं। देश में पहली बार पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इतना बड़ा कदम उठाया गया है। सार्वजनिक जगहों, समुद्री तटों, बस और रेलवे स्टेशनों, वन, संरक्षित वन, इको सेंसेटिव जोन, सिनेमा हाल, सरकारी, गैर-सरकारी संस्थानों, शिक्षा संस्थान, ड्रामा थियेटर, मॉल्स, सब्जी बाजार, सब्जी मंडी, दुकानदार, हॉकर्स, होलसेलर, रिटेलर और औद्योगिक संस्थान खास निशाने पर होंगे।
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपए और तीसरी बार पकड़े जाने पर 25 हजार रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही तीन महीने की जेल भी हो सकती है। राज्य सरकार ने गुढी पाडवा के मौके पर 18 मार्च से राज्य में प्लास्टिक बंदी कानून लागू करने का निर्देश दिया था। परंतु प्लास्टिक निर्मताओं के हाई कोर्ट में जाने से, उन्हें 3 महीने की मोहलत मिल गई थी। अब सरकार ने 23 जून से इसे पूरे  राज्य में सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। प्लास्टिक बैन के फैसले पर हाई कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्लास्टिक निर्माताओं ने एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी है। सरकार ने हाई कोर्ट को सूचित किया है कि उसने सभी स्थानीय प्राधिकारियों को प्लास्टिक पाबंदी के संबंध में सूचना दे दी है।
प्लास्टिक से बनाई जाने वाली थैलियों, थर्माकोल के अलावा प्लास्टिक से बनने वाली डिस्पोजेबल पर बैन होगा। प्लास्टिक की थाली, कप, प्लेट, ग्लास, कांटा चम्मच, कटोरी, स्ट्रॉ, कटलरी, स्प्रेड शीट्स, प्लास्टिक पाउच के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगाया गया है। प्लास्टिक के उत्पादन, इस्तेमाल, संग्रह, वितरण, थोक या फुटकर बिक्री, आयात पर पूरी तरह से पाबंदी होगी। हालांकि कुछ प्लास्टिक उत्पादों को राहत दी गई है। बोतल बंद पानी पर अभी पाबंदी नहीं लगाई है। पानी की बोतलों के लिए एक रुपए और दूध की थैलियों के लिए 50 पैसे का पुनर्खरीद मूल्य निर्धारित किया गया है। दूध डेयरी, वितरक और विक्रेताओं के लिए थैलियां वापस खरीदना अनिवार्य होगा। पानी की बोतलों के उत्पादकों, विक्रेताओं और वितरकों को भी पुनर्खरीद की व्यवस्था करनी होगी।  दवाओं की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होनेवाली प्लास्टिक, वन व फलोत्पादन, कृषि, कचरा उठाने, पौधारोपण के उपयोग में आनेवाली प्लास्टिक थैलियां और प्लास्टिक शीट के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई गई है।
इससे पहले सरकार ने संबंधितों को कहा था कि प्रतिबंधित प्लास्टिक की वस्तुओं और प्लास्टिक कचरों के संग्रहण, ढुलाई और निपटारे की व्यवस्था करने के लिये एक तंत्र बनाएं। सरकार ने इस संबंध में 23 मार्च को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें एक बार इस्तेमाल होने वाली थैलियों,चम्मचों,प्लेट,पीईटी और पीईटीई बोतलों और थर्मोकोल वस्तुओं समेत सभी प्लास्टिक की सामाग्रियों के निर्माण, इस्तेमाल, बिक्री, वितरण एवं भंडारण पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश था। इस अधिसूचना को प्लास्टिक, पीईटी बोतल और थर्मोकोल निर्माता एवं खुदरा एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति एएस ओक और न्यायमूर्ति रियाज चागला की खंडपीठ ने अप्रैल में अधिसूचना पर प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया था। खंडपीठ ने साफ किया कि पर्यावरण पर प्लास्टिक कचरे के प्रतिकूल प्रभावों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
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