जीएसटी दर कम करने के पीएम के बयान को कारोबारियों ने सराहा 

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मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीएसटी के कर ढांचे को और सरल बनाने तथा 28 प्रतिशत की कर दर को केवल कुछ वस्तुओं तक ही सीमित किए जाने के बयान का व्यापारियों ने स्वागत किया है। 

28 प्रतिशत की कर दर कुछ वस्तुओं तक ही सीमित होगी 

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का सकारत्मक बयान ऐसे समय में आया है, जब देश भर के व्यापारी जीएसटी के ढांचे को और तर्क संगत बनाए जाने को लेकर जीएसटी कॉउन्सिल से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। 
 
खंडेलवाल के अनुसार बहुत सी वस्तुएं ऐसी हैं जो उद्योग में कच्चे माल के रूप में काम आती हैं। लेकिन उन पर कर की दर 18 प्रतिशत है जबकि उसी कच्चे माल से बने हुए उत्पाद की कर दर 12 प्रतिशत है। इलके कारण व्यापारियों को 6 प्रतिशत का रिफंड मिलना तय होता है। परंतु रिफंड की जटिल प्रक्रिया से अभी तक देश भर में रिफंड नहीं मिल पा रहा है ।
वर्तमान जीएसटी में अनेक विसंगतियां हैं, जिसे ठीक करना जरूरी है । व्यापारियों को उम्मीद है जीएसटी कॉउन्सिल की 22 दिसंबर को होने वाली मीटिंग में इन सभी मुद्दों पर विचार किया जायेगा और तर्कसंगत निर्णय लिए जाएंगे। यह फैसला देश के व्यापारियों और राजस्व के हित में होगा।
खंडेलवाल के मुताबिक देश में जीएसटी लागू हुए लगभग डेढ़ वर्ष बीत गया है। अब सही समय है जब जीएसटी को एक स्थाई कर प्रणाली के रूप  में स्थापित हो जाना चाहिए। गत समय से कैट लगातार जीएसटी के सरलीकरण की मांग उठाता रहा है। वहीं 28 प्रतिशत टैक्स के स्लैब को केवल कुछ विलासिता की वस्तुओं तक ही सीमित रखने की मांग करता रहा है।
इसी प्रकार 18 फीसदी के कर स्लैब में से भी अनेक वस्तुओं को निकाल कर 12 प्रतिशत या उससे कम दर के कर स्लैब की वाजिब मांग करता आ रहा है। प्रधानमंत्री का बयान इस बात का प्रतीक है कि सरकार ने इसकी जरूरत को समझा है और वर्तमान कर ढांचे की विषमताओं को कम करने का इरादा जाहिर किया है।
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