कांग्रेस ने बढ़ाया सहकारिता मंत्री देशमुख को हटाने का दबाव 

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मुंबई- कांग्रेस ने सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख को मंत्री पद से हटाने का दबाव राज्य सरकार पर बढ़ा दिया है। पार्टी के मुंबई अध्यक्ष संजय निरूपम के मुताबिक देशमुख तीन मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं। लिहाजा उन्हें तत्काल मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए।
निरूपम का आरोप है कि दोष साबित होने के बाद भी सरकार देशमुख को संरक्षण दे रही है। साथ ही निरूपम ने अडानी बिजली कंपनी की दर वृद्धि मामले में राज्य नियामक आयोग की जांच कराने की मांग की है। 

“देशमुख पर भ्रष्टाचार के तीन आरोप “

पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए निरूपम ने कहा कि सीएम देवेंद्र फडणवीस व भाजपा हमेशा पारदर्शक और भ्रष्टाचार मुक्त काम का दुहाई देते हैं। परंतु फडणवीस सरकार के मंत्रिमंडल में सहकारिता मंत्री देशमुख पर भ्रष्टाचार के 3 मामले साबित हुए हैं।  बावजूद इसके देशमुख मंत्री पद पर बने हुए हैं। देशमुख की लोकमंगल मल्टीस्टेट को. ऑपरेटिव सोसायटी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राज्य सरकार से 5 करोड़ रुपए का अनुदान लिया है।
भ्रष्टाचार साबित होने के बाद मुख्यमंत्री ने 5 करोड़ रुपए वापस करने के आदेश दिए। परंतु आदेश के आखिर में लिखा गया है लोकमंगल सोसायटी, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत सभी मूल दस्तावेजों को नए सिरे से प्रस्तुत कर सकती है। निरूपम के अनुसार सीएम के आदेश में एफआईआर दर्ज करने का जिक्र नहीं है। इससे साफ है सीएम ही दागी मंत्रियों को बचा रहे हैं। राज्यापाल से मुलाकात करके देशमुख के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी। इसके बाद 27 नवंबर को सोलापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें देशमुख का नाम नहीं है। उनके पुत्र रोहन व 8 निदेशकों पर एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन कमजोर धाराएं लगाई गई हैं।
निरूपम ने राज्य नियामक आयोग की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी औऱ आयोग के बीच सांठगांठ है। दोनों ने मिलकर बिजली दर बढ़ाएं हैं, जिससे मुंबई उपनगर की जनता हलकान है। उन्होंने बिजली दर 50 प्रतिशत घटाने संबंधी आदेश देने की मांग मुख्यमंत्री से की है। निरूपम के अनुसार मुंबई उपनगर में बिजली आपूर्ति करनेवाली अडानी पॉवर लिमिटेड ने सितंबर महीने से बिजली दर में 50 फीसदी वृद्धि का ही। पार्टी द्वारा 15 स्टेशनों पर आंदोलन करने के बाद सीएम ने बिजली दर वृद्धि की जांच कराने के आदेश दिए थे। परंतु यह आदेश छलावा और दिखावा है। यदि सही अर्थो में सीएम को जनता के प्रति सहानुभूति है तो अडानी और राज्य नियामक आयोग को आदेश देकर बिजली की दर कम करा सकते हैं। राज्य सरकार को इलेक्ट्रेसिटी एक्ट-108 के तहत यह अधिकार है।
निरूपम ने मुख्यमंत्री से मांग की है एफआईआर में देशमुख का भी नाम होना चाहिए, क्योंकि वे मुख्य आरोपी हैं। देशमुख पर फर्जी दस्तावेजों से संबंधित धारा 467 लगनी चाहिए। इस धारा के तहत कानून में 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है। निरूपम ने देशमुख से जुड़े दूसरे और तीसरे आरोपों को गिनाते हुए बताया कि लोकमंगल एग्रो कंपनी की तहत शेअर मार्केट में 72 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है।
सेबी ने इस पर अंतिम फैसला सुनाया है। तीसरा प्रकरण उनके बंगले से जुड़ा हुआ है। सोलापुर कमिश्नर ने देशमुख के अनधिकृत बंगले को गिराने का आदेश दिया है। देशमुख को तत्काल मंत्री पद से हटाने की मांग निरूपम ने फिर दोहराई है।
 
 
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