शिक्षा में दीमक बन गए निजी कोचिंग क्लास-तावड़े

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मुंबई- निजी कोचिंग क्लासेस के नाम पर शिक्षा क्षेत्र में शुरू हुई इंटीग्रेटेड नाम की व्यवस्था मतलब शिक्षा क्षेत्र में दीमक है। यह नाराजगी सोमवार को नागपुर विधान सभा में शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने जताई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में शिक्षा का बजारीकरण और लूट नहीं होने दी जाएगी।

राज्य में तकरीबन 50 हजार से अधिक निजी कोचिंग क्लासेस हैं। अनेक कोचिंग क्लासेस के निदेशक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अभिभावकों को फंसाते हैं। अधिक से अधिक नंबर लाने का सपना दिखाकर अभिभावकों से लाखों रुपए की लूट की जाती है।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से पूछे गए सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में तकरीबन 50 हजार से अधिक निजी कोचिंग क्लासेस हैं। अनेक कोचिंग क्लासेस के निदेशक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अभिभावकों को फंसाते हैं। अधिक से अधिक नंबर लाने का सपना दिखाकर अभिभावकों से लाखों रुपए की लूट की जाती है। इसके जवाब में तावडे ने कहा कि फिलहाल शिक्षा क्षेत्र का बाजारीकरण हो गया है और इसमें से इंटीग्रेटेड तेजी से पनपी है। लाखों रुपए खर्च कर छात्र इसतरह की इंटीग्रेटेड क्लास में प्रवेश लेते हैं। अभिभावकों को इमोशनल ब्लैकमेलिंग किेया जाता है। इस इंटीग्रेटेड के बाजारीकरण पर रोक लगाने के लिए 11 वीं और 12 वीं की उपस्थिती बायोमेट्रिक तरीके से करने की शुरुआत की गई है। इस बारे में पालकों को जागरुक रहने की आवश्यकता है।

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