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पुलिस द्वारा कई डिटेक्टिव एजेंसी के जासूसों की गिरफ़्तारी!

मुंबई- राज्य के सभी प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी के काम -काज के तरीकों  की पुलिसिया जांच की जाएगी. यह घोषणा गृहराज्यमंत्री रणजीत पाटिल ने विधान परिषद में की. उन्होंने कहा कि डिटेक्टिव एजेंसी द्वारा किसी भी शख्स की निजी  बातों  को रिकॉर्ड करना निजता पर हमला है. लोगों की निजी बातों को रिकॉर्ड करने के मामले में ठाणे पुलिस द्वारा कई डिटेक्टिव एजेंसी के जासूसों की गिरफ़्तारी का मुद्दा मंगलवार को विधान परिषद में उठा.

इंडियन टेलीग्राफिक कानून के तहत सिर्फ 12 सरकारी एजेंसी को फोन टेपिंग का अधिकार है. इनके अलावा कोई ऐसा करता है तो कानून के तहत  7 साल के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है – गृहराज्यमंत्री रणजीत पाटिल

कांग्रेस  सदस्य अनंत  गाडगिल ने  ध्यानकर्षण प्रस्ताव के तहत इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने सदन में कॉल रिकॉर्ड करने वाली एक मशीन को दिखाते हुए कहा कि इस तरह के यन्त्र आसानी से इम्पोर्ट किए जा रहे हैं. इम्पोर्ट करने के लिए किसी तरह की पाबन्दी नहीं है. राष्ट्रवादी सदस्य हेमन्त टकले व शिवसेना सदस्य अनिल परब ने पूछा कि क्या इस तरह के डिटेक्टिव एजेंसी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार अलग से कोई कानून बनाएगी. इसके जवाब में गृहराज्यमंत्री पाटिल ने कहा कि  इंडियन टेलीग्राफिक कानून के तहत सिर्फ 12 सरकारी एजेंसी को फोन टेपिंग का अधिकार है. इनके अलावा कोई ऐसा करता है तो कानून के तहत  7 साल के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा गंभीर है . इस पर लगाम लगाने के लिए पुलिस महानिदेशक को एक स्पेशल ड्राइव चलाने का निर्देश दिया जाएगा, जिसके तहत सभी  डिटेक्टिव एजेंसी की जांच करने के अलावा उनका एक डाटा बेस भी तैयार किया जाएगा. इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि प्राइवेट  डिटेक्टिव एजेंसी  किसी तरह का अवैध काम नहीं कर सके.

एनसीपी की विद्या चव्हाण ने कहा कि आजकल कई जगहों पर महिलाओं की निजता को बड़ा खतरा है.  डिटेक्टिव एजेंसी उनकी बातचीत को रिकॉर्ड कर रहे हैं तो चेंजिंग रूम में गुप्त कैमरा लगा कर उनकी अश्लील तस्वीर निकाली जाती है. उन्होंने सरकार से महिलाओं की निजता को सुनिश्चित करने की मांग की. गृहराज्यमंत्री पाटिल ने बताया कि  कॉल डेटा रिकॉर्ड  लीक मामले में कई डिटेक्टिव एजेंसी के जासूसों समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सेंटर (केंद्र सरकार ) का सब्जेक्ट है.  इस तरह के अपराध को रोकने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज कर कार्रवाई करने के लिए दिशा – निर्देश प्राप्त करेगी.
शिवसेना सदस्य अनिल परब ने सवाल किया कि क्या कॉल डेटा रिकॉर्ड लीक करने में किसी मोबाइल कंपनी का हाथ है. इसके जवाब में गृहराज्यमंत्री रणजीत पाटिल ने कहा कि इसमें किसी मोबाइल सर्विस कंपनी की कोई भूमिका नहीं पाई गई है. इस वजह से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

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