वैट से जमानत राशि का प्रावधान रद्द

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मुंबई- राज्य सरकार ने कारोबारियों को राहत देने के इरादे से मूल्यवर्धित कर अधिनियम (वैट) से जमानत राशि जमा करने के प्रावधान को रद्द करने का फैसला किया है। अधिनियम में संशोधन करने संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।  

व्यापारियों को मिली राहत 

 राज्य में महाराष्ट्र वस्तू एवं सेवा कर (जीएसटी) एक जुलाई 2017 से लागू किया गया है। हालांकि छह वस्तुओं पर  वैट) लिया जाता है। इन छह वस्तुओं में कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, विमान का ईंधन और शराब का समावेश है। छह वस्तुओं पर वैट वसूले जाने से महाराष्ट्र मूल्यवर्धित कर अधिनियम-2002 का दायरा सीमित रह गया है।  कानून के प्रावधानों के अनुसार, यदि सालाना कारोबार 10 लाख रुपए से अधिक है तो व्यापारियों को पंजीकरण प्रमाण पत्र लेना  अनिवार्य होता है। हालांकि यह सीमा पार करने से पहले व्यापारियों को स्वैच्छिक पंजीकरण कराने की सहूलियत दी गई है। इसतरह का पंजीकरण कराते समय संबंधित व्यापारी को बतौर जमानत राशि  25 हजार रुपए जमा कराना अनिवार्य है। यह राशि तीन साल बाद व्यापारी को वापस कर दी जाती है। जीएसटी में इसतरह का कोई प्रावधान नहीं है। जीएसटी और वैट में समानता लाने के मकसद से  स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए जमानत राशि जमा कराने की शर्त को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इससे व्यापारियों को अपना कारोबार करने में आसानी होगी।
इसके अलावा वैट अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार  व्यापारियों को बैंक के चालू खाते का विवरण देना भी अनिवार्य था। व्यापारियों से बकाया राशि वसूलने के लिए यह विवरण आवश्यक होता है।  व्यापार की सुलभता के लिए वैट के अंतर्गत  25 अप्रैल 2018  को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार यह प्रावधान रद्द कर दिया गया है। पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलने के बाद संबंधित व्यापारी को निर्धारित समय सीमा में बैंक खाते का विवरण वस्तू एवं सेवा कर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराना जरूरी होगा। यदि निर्धारित अवधि के भीतर व्यापारी ने विवरण नहीं दिया तो पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया जाएगा। यह बदलाव भी अधिनियम में करने की मंजूरी दी गई है।
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