एसटी कर्मचारियों की हड़ताल से परेशान हुई जनता सरकार ने की कार्रवाई 

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मुंबई- एसटी कर्मचारियों की शुक्रवार को हुई अघोषित हड़ताल से जनता को कई समस्याओं से दो चार होना पड़ा है। साथ ही कर्मचारियों की हड़ताल से राज्य सरकार को 15 करोड़ रूपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। राज्य सड़क परिवहन विभाग ने इसके लिए कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की है।
सरकार भी हाथ-पांव फूल गए। सरकार ने गैर-हाजिर रहनेवाले हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया है। एक हजार से अधिक कर्मचारियों को नोटिस भेजी गई है। इसमें केकण, मुंबई, ठाणे, अमरावती सहित प्रदेश के कई जिलों के कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों की बड़ी संख्या में अनुपस्थित रहने से प्रदेश के 258 बस डिपो में से केवल 30 फीसदी बसें ही सड़क पर उतर सकी।
एसटी कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लकेर बिना किसी पूर्व सूचना के गुरूवार देर रात से हड़ताल पर चले गए। एसटी बसों का चक्का थमने से सुबह बस पकड़ने पहुंचें लोग परेशान हुए। विद्यार्थियों को परीक्षा देने में दिकक्तें आईं। इधर सरकार भी हाथ-पांव फूल गए। सरकार ने गैर-हाजिर रहनेवाले हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया है। एक हजार से अधिक कर्मचारियों को नोटिस भेजी गई है। इसमें केकण, मुंबई, ठाणे, अमरावती सहित प्रदेश के कई जिलों के कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों की बड़ी संख्या में अनुपस्थित रहने से प्रदेश के 258 बस डिपो में से केवल 30 फीसदी बसें ही सड़क पर उतर सकी। कुल मिलाकर एसटी बस कर्मचारियों के विभिन्न मांगों को लेकर हुआ यह आन्दोलन सफल रहा है।
इस हड़ताल के पीछे एसटी बस कर्मचारियों की कोई संस्था ने जिम्मेदारी नहीं ली है। कोई संगठन खुलकर आगे नहीं आ रहा है। राज्य सरकार ने एसटी कर्मचारियों के आन्दोलन को संज्ञान में लेते हुए बातचीत के लिए बुलाया है। इससे पहले वेतन वृद्धि को लेकर एसटी कर्मचारियों ने आंदोलन किया था। लगातार 12 दिन तक चले आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार ने उन दिनों वेतन वृद्धि का आश्वासन दिया था। परंतु वेतन बढ़ोतरी पर ठोस फैसला न होने से नाराज कर्मचारी फिर से आंदोलन पर उतर गए हैं।
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