पुणे और और नाशिक में  जल्द विशेष न्यायालय

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मुंबई- एट्रोसिटी के लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए पुणे और नाशिक में जल्द स्वतंत्र विशेष न्यायालय शुरू करने का निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधितों को दिया है। यह निर्देश मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्यस्तरीय उच्चाधिकार दक्षता और संनियंत्रण समिति की बैठक में दिया। उन्होंने एट्रोसिटी कानून पर सख्ती से अमल करने का निर्देश भी दिया है। 

मुख्यमंत्री ने दिया शुरू करने का निर्देश 

राज्य में एट्रोसिटी के मामले के जल्द निपटारे के लिए औरंगाबाद, नागपुर, अमरावती और ठाणे में स्वतंत्र विशेष न्यायालय शुरू हैं। पुणे और नाशिक में भी काम  जल्द शुरू करने की सूचना मुख्यमंत्री ने दी है। सहयाद्री अतिथी गेस्ट हाउस में हुई बैठक में सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले, शिक्षा मंत्री विनोद तावडे और सामाजिक न्याय राज्यमंत्री दिलीप कांबले सहित संबंधित विभागों के मंत्री, आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
राज्य सरकार ने विशेष न्यायालय ठाणे, पुणे, नाशिक,  औरंगाबाद, अमरावती और नागपुर विभाग में स्थापित करने का निर्णय लिया है। पुणे और नाशिक में न्यायालय कार्यान्वित नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री ने आनेवाली महीने में पुणे और नाशिक में विशेष न्यायालय कार्यान्वित करने का निर्देश संबंधितों को दिया है। प्रदेश में वर्ष 2014 से जुलाई 2018 तक एट्रोसिटी के कुल 1341 मामले लंबित हैं। नागपुर में 182, अमरावती- 203, नाशिक-212, नांदेड़-166, कोल्हापुर-302, औरंगाबाद-154  और कोकण में 106 मामले विचाराधीन हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर अन्याय, अत्याचार न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने संबंधितों को अत्याचार प्रतिबंधक कानून (एट्रोसिटी) पर कड़ाई से अमल करने का निर्देश दिया है।
 
मुख्यमंत्री ने बैठक में समिति सदस्यों द्वारा रखी गई सूचनाओं के संदर्भ में गृह विभाग और प्रशासन को निर्देश दिए हैं। पांच साल के अपराधों के संख्यात्मक आधार पर विश्लेषण करने को कहा गया है। 
पुलिस विभाग को कानून और नियमों की साधारण भाषा में पुस्तिका तैयार करने की सूचना भी मुख्यमंत्री ने दी है।
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