राफेल डील की जेपीसी जांच से क्यों भाग रही भाजपा सरकार- मनु सिंघवी 

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मुंबई, । फ्रांस के लड़ाकू विमान राफेल डील को लेकर भाजपा और कांग्रेस में ठन गई है। भाजपा ने जहां देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा माफी मांगने की मांग को लेकर अड़ी है तो वहीं कांग्रेस का कहना है  मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट  को गुमराह किया है।

भाजपा और कांग्रेस में ठनी 

मुंबई दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम  कोर्ट के फैसले में सीएजी रिपोर्ट का जिक्र है, जबकि यह रिपोर्ट अभी तक पीएसी को मिली ही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार राफेल डील मामले की जेपीसी जांच कराए जाने से क्यों भाग रही है।
 
मुंबई कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सिंघवी ने  कहा कि  वर्ष 1989 के बोफोर्स तोप में हुए कथित घोटाले के लिए बीजेपी ने जेपीसी की मांग की थी,  इसके अलावा वर्ष 1992 के हर्षद मेहता घोटाला और वर्ष 2013 में वीआईपी हेलीकाप्टर खरीदी मामले में भी भाजपा ने जेपीसी गठन की मांग की थी।  सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सरकार का पक्ष सुनकर फैसला सुनाया है, जिसमें सीएजी रिपोर्ट का जिक्र है। यह रिपोर्ट पीएसी को नहीं मिली है। 
अटॉर्नी जनरल को अपना पक्ष पीएसी के सामने रखना चाहिए। प्रत्यक्ष तौर पर यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला बनता है। सिंघवी के मुताबिक सरकार का कहना है कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस और राफेल की कंपनी  दसॉल्ट के बीच वर्ष  2012 से संबंध हैं। सच्चाई यह है कि अनिल अंबानी की कम्पनी रिलायंस डिफेन्स को पीएम मोदी की फ़्रांस यात्रा से महज 15 दिन पहले रजिस्टर किया गया था। 
 
 सिंघवी के मुताबिक राफेल डील में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल ) का नाम कहीं नहीं था। सच्चाई यह है कि  मार्च 2014 में राफेल विमान को खरीदने के लिए  एचएएल की दसॉल्ट से बातचीत शुरू हो गई थी, जिसकी पुष्टि खुद दसॉल्ट ने अपने पत्रों में की है। एनसीपी मुखिया व पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने भी इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। पवार के अनुसार  मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को राफेल के मामले में गलत जानकारी दी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को फंसाने का काम किया है। 
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