कृषि और ग्राम विकास के लिए सरकार की ‘राज्य फोकस पेपर’ योजना 

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– मुख्यमंत्री ने किया योजना का लोकार्पण –

मुंबई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाबार्ड के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए तैयार किए गए‘राज्य फोकस पेपर’को गांवस्तर पर लागू करने का निर्देश संबंधितों को दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है जल संरक्षण की परियोजना से पेयजल की उपयोगिता को बड़े पैमाने पर प्रभावशाली बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जल परियोजनाओं के डिजिटाइजेशन के लिए नाबार्ड को पहल करने का निर्देश दिया है।
सह्याद्री गेस्ट हाऊस में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नाबार्ड की ओर से राज्य कर्ज संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसमें संबंधित विभागों के आला अधिकारी और बैंकर्स समिति के अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने राज्य फोकस पेपर 2018-19 का और ई-शक्ति पुस्तिका का प्रकाशन किया। वर्ष 2018-19 में फसल उत्पादन से लगभग 62 हजार 763 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। कृषि के लिए ऋण की अवधि और उससे संलग्न उपक्रमों के लिए 20 हजार 633 करोड़ रुपए का अनुमान व्यक्त किया गया है। कृषि क्षेत्र की बुनियादी परियोजनाओं के लिए 4 हजार 206 करोड़ रुपए तो कृषि और उससे संलग्न उपक्रमों के लिए कुल 93 हजार 618 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया है। कृषि सहित अन्य उपक्रमों के लिए तकरीबन 3 लाख 70 हजार 180 करोड़ रुपए का अनुमान नाबार्ड के अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण देते हुए व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए नाबार्ड ने पिछले दो साल में 520 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है, जिसके लिए वर्ष 2018-19 के लिए 500 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार फोकस पेपर के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण भागों में जल संरक्षण परियोजना, कृषि क्षेत्र का विकास, महिला बचत समूहों के सशक्तिकरण, लघु-सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य पर अमल करने का प्रयाश किया जाना चाहिए। किसानों की आय दोगुना बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के विभिन्न उपायों के साथ-साथ सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के लिए बुनियादी ढांचा निर्माण किया जाना चाहिए। फोकस पेपर के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए तीन से चार महीनें में फिर से बैठक बुलाई जानी चाहिए। निर्धारित लक्ष्य कितना पूरा हुआ, इसकी समीक्षा के लिए वर्ष में एक बैठक बुलाने के बजाए, हर तीन से चार महीने में बैठक आयोजित की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक जलयुक्त शिवार योजना के माध्यम से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का काम शुरू है। इस योजना के माध्यम से निर्माण की गई सिंचाई सुविधा से पानी के उपयोग पर अधिक प्रभावी अमल होना जरूरी है। नाबार्ड विशेष निधि का प्रबंध करके जल संरक्षण परियोजनाओं का डिजिटाइजेशन करे। कृषि क्षेत्र को क्रेडिट उपलब्ध कराने की बैंक पहल करें। बैंख शाखाओं का जाल बिछाया जाए। डिजिटाइजेशन के लिए सात जिलों में ई-शक्ति परियोजना लागू की जा रही है। यह एक सराहनीय पहल है, जो पारदर्शिता और गति बनाए रखने में मदद करेगी।
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