“श्री सम्मेतशिखरजी” को पर्यटन स्थल बनाने  के विरोध में रैली 

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मुंबई- जैन धर्म के 20-20 तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि (मोक्षभूमि) यानी सम्मेतशिखरजी तीर्थ  जो झारखंड में स्थित है। इस तीर्थ स्थल को   के पर्यटन स्थल बनाने के फैसले के खिलाफ में मुंबई में विराट रैली निकालकर जैन समुदाय ने विरोध जताया। चिंचपोकली में चातुर्मास के लिए विराजमान जैन मुनिश्री विनीतसागरजी महाराज एवं क्रांतिकारीमुनिश्री विनम्रसागरजी महाराज के सानिध्य में श्री सम्यक उपासना जैन संघ द्वारा शांतिकमल टावर (चिंचपोकली-ईस्ट) से ओम शांति ग्राउंड, भायखला तक विराट रैली निकाली गई।

रैली में मुंबई के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी,उद्योगपति, राजनेता सहित अनुयायी मौजूद

रैली में मुंबई के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी,उद्योगपति, राजनेता सहित जिनशासन प्रेमी अनुयायी मौजूद थे । भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा भी रैली में शामिल थे। बच्चो से लेकर बुजुर्गो तक सभी जिनशासन के झंडे एवं विरोध का बैनर लेकर चल रहे थे । रैली में “सेव शिखरजी- जय शिखरजी” के नारे लगे। श्री सम्मेतशिखरजी तीर्थ जैन धर्मियों के लिए पूजा,उपासना का एक पवित्र स्थल है । जैनों द्वारा इस पुरे पहाड़ की उपासना कई वर्षों से की जा रही है। इस तीर्थ को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित किया जा रहा है | पूजा और उपासना के स्थल को पर्यटन स्थल का स्वरूप देना मतलब संपूर्ण जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को दुखाना है।
 
भायखला के ओम शांति ग्राउंड में आयोजित तीर्थरक्षा सभा में  जैन संतों ने बताया कि यह तीर्थ जमीन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि पुरे जैन समाज के लिए संपूर्ण पहाड़ आध्यात्मिक अस्तित्व और मान्यताओ की जड़ो से युक्त पूजा उपासना का एक महत्वपूर्ण आलंबन है। कैसे एक साध्वीजी और एक श्राविका ने शिखरजी तीर्थ को अंग्रेजो के कुटिल इरादों से बचाया था। मुनिश्री विनम्रसागरजी ने कहा कि हमारी 2 मांगें हैं। शिखरजी पर्वत को पूजा उपासना के स्थल के रूप मे मान्यता दें और शिखरजी को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित न करें। हम तीर्थ के लिए कोई सब्सीडी नही मांग रहे हैं। हमें सिर्फ हमारा हक चाहिए। सम्मेतशिखरजी को जब तक होल वर्शीप का दर्जा नही मिलता तब तक हमे पुरुषार्थ करते रहना है। हमे हर रोज़ 12 नवकार गिनना है, ज्यादा से ज्यादा याचिकाएं फाइल करें।
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