चूहा घोटाले पर गरमाई राजनीति!

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मुंबई – मंत्रालय में चूहा घोटाले का आरोप लगाकर पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। अब इस मामले को लेकर भाजपा के अंदरखाने ही टकराव की आहट सुनाई देने लगी है। वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने परोक्ष रूप से खड़से पर पलटवार किया है। मुनगंटीवार ने कहा है कि मंत्रालय में चूहे मारने की दवा रखी गई थी। इसका यह अर्थ नहीं है कि सभी दवा की गोलियां खाकर चूहे मर गए। गलत अर्थ निकालनेवालों को भगवान सद्बुद्धि दें। इधर भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि मंत्रालय अब चूहालय हो गया है। मंत्रालय को चूहामूक्त बनाने की जवाबदारी अब भाजपा की है।  
वित्त मंत्री मुनगंटीवार ने दी खड़से को नसीहत. शिवसेना ने कसा तंज, मंत्रलाय तो बन गया ‘चूहालय’ 
 मुनगंटीवार रविवार को शिर्डी के साईंबाबा का दर्शन करने पहुंचे थे। पत्रकारों से बातचीत में मुनगंटीवार ने चूहा घोटाले के मुद्दे पर खड़से की चुटकी ली। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया। मुनगंटीवार ने कहा कि गलत अर्थ निकालकर
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घोटाले का नाम दिया जा रहा है। मंत्रालय में चूहे मारने के टेबलेट रखे गए थे क्योंकि चूहे फाइलों को कुतर न दें। तीन से साढ़े तीन लाख टेबलेट, जिसकी एक गोली की कीमत एक–डेढ़ रुपए है।तकरीबन चार लाख रुपए के टेबलेट मंत्रालय में रखे गए थे। इसका यह मतलब नहीं है कि जहां एक गोली रखी गई, वहां चूहा खा ही ले और मर जाए। कितनी गोलियां रखी गई, तो उतने चूहे मरे, चुहों का वजन कितना था, मरे चूहों को नष्ट कैसे किया गया। गोलियों और दिन के आधार पर चूहे मारने पर तर्क-वितर्क निकालना उचित नहीं है। यैसा अर्थ निकालनेवालों को भगवान साईंबाबा सद्बुद्धि दें। सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को उचित ढंग से मतलब निकालना चाहिए। मुनगंटीवार ने खड़से को नसीहत दी कि जनता का व्यवस्था पर पहले से विश्वास कम हो गया है, उसी में यैसे बयान देकर और विश्वास कम न किया जाए। मुनंटीवार ने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी सरकार की नीतियों के कारण राज्य पर कर्ज का खड़ा हो गया है। इस बोझ को कम करने में हम सफल हुए हैं। कर्ज का आंकड़ा भले ही बड़ा है, परंतु राज्य की आय उस तुलना में बढ़ी है।   

 
फट गया पारदर्शी ढोल
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना के माध्यम से फडणवीस सरकार को आड़े हाथों लिया है। मंत्रालय की तुलना चूहालय से की गई है। शिवसेना ने तंज कसे हैं कि चूहा घोटाले ने सरकार की तिजारी कुतर दी है। पारदर्शी कामकाज का ढोल भी फोड़ दिया है। महाराष्ट्र के कथित साफ- सुथरे प्रशासन में बिल बन गई। मंत्रालय की जमीन खोखली हो गई है और वह घोटालेबाज चूहायुक्त हो गया है। यैसे आरोप सत्ताधारी पार्टी के लोग ही लगा रहे हैं। खड़से ने किस मकसद से घोटाले का विस्फोट किया है, यह तो वही जानते होंगे लेकिन राज्य का मंत्रालय घोटालेबाज चूहायुक्त हो गया है। मंत्रालय को चूहामुक्त बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं की है, अन्यथा राज्य की जनता पिंजरा लगाकर बैठी है। 
 
क्या है मामला 
बीते गुरूवार को विधान सभा में भाजपा नेता व पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने चूहा घोटाला का मुददा उठाकर पूरे सदन को सकते में ला दिया था। खडसे ने कहा मुंबई मनपा दो वर्ष में छह लाख चूहे मारती है। जबकि मंत्रालय में एक सप्ताह यानि 3 मई 2016 से 10 मई 2016 तक 3 लाख 19 हजार 4 सौ चूहों के मारने का कारनामा कर दिखाया गया है। खड़से ने वर्क आर्डर क्रमांक 131 व 132 का हवाला देते हुए कहा कि एक सप्ताह में मंत्रालय के 319400चूहे मारे गए है। प्रत्येक दिन 44628.57 चूहे मारे गए है, प्रत्येक घंटा 1901.19 चूहे और प्रत्येक मिनट 31.68 चूहे मारे गए है। यानी प्रत्येक दिन मारे गए चूहे का वजन 9125.71 था। यानी 9 टन 125 किलो (एक ट्रक चूहे मारने का रिकार्ड) दर्ज किया गया है। खडसे ने सवाल किया इतने भारी पैमाने पर मारे गए चूहे को दफनाया या नष्ट कहां किया गया, कौन किया, क्या वह जगह दिखाई जाएगी जहां कैसे चूहों को दफन किया गया? खड़से ने सवाल उठाया कि मंत्रालय में गृह विभाग व सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति के बिना विष कैसे गया। जिस संस्था को चूहा मारने का काम दिया गया था, क्या उसके पास विष प्राप्त करने की अनुमति है? खडसे ने इस घोटाले की जांच कराने की मांग की थी।
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