आतंकवादियों का सामना करते समय रखें मानवाधिकार का ख्याल!

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मुंबई। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायमूर्ति सुजाता मनोहर ने कहा है कि आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए इस भात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि मानवी अधिकारों का उल्लंघन न हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मानव अधिकारों की रक्षा करना बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इन अधिकारों के क्रियावनयन के लिए हर जगह व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए।
मानवाधिकार दिवस पर विशेषज्ञों की राय 
राज्य मानवाधिकार आयोग की ओर से मानवाधिकार दिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को पूर्व न्यायमूर्ति सुजाता मनोहर संबोधित कर रही थी।इस अवसर पर महाराष्ट्र लोकसेवा अधिकार आयोग के अध्यक्ष स्वाधीन क्षत्रिय, ईडी के विभागीय निदेशक विनित अग्रवाल, टाटा सामाजिक संस्था के अधिष्ठाता अरविंद तिवारी, अंतरराष्ट्रीय न्याय अभियान के संजय मकवान, राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रभारी अध्यक्ष एम. ए. सईद, प्रभारी सचिव दिलीप बनकर आदि मौजूद थे।
पूर्व न्यायाधीश सुजाता ने कहा कि वेश्विक स्तर पर कई जगहों पर मानव अधिकारों पर जागरूकता फैलाई जा रही है।महामंडल, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को मानव अधिकारों को प्रति सचेत करने की ज़िम्मेदारी है। सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में मानव अधिकारों का क्रियान्वयन होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर, कृषि उत्पाद खरीदी, किसानों को योग्य दाम मिलना आदि को भी मानवाधिकार की परिभाषा में ही होना चाहिए। प्रत्येक बजट में मानव अधिकारों के लिए उचित प्रावधान होना चाहिए। कंपनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व निधि में भी मानव अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए निधि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को सन्मान से जीने एवं स्वतंत्रता का अधिकार मिले इसके लिए प्रयास होना चाहिए।
 
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