अनाथ बच्चों को मिलेगा एक फीसदी आरक्षण 

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अनाथ बच्चों को 1 फीसदी आरक्षण देने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया है । सोमवार को जारी किए गए शासनादेश के मुताबिक अनाथ बच्चों को एक फीसदी आरक्षण देने का निर्णय 17 जनवरी 2018 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था।
निर्णयानुसार सरकारी नौकरी, कॉलेज में प्रवेश व अन्य सरकारी सुविधाओं में अब से आवेदन फार्म में एक कॉलम अनाथ का भी होगा. यह आरक्षण स्कॉलरशिप, छात्रावास, व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति में भी लागू होगा
महिला व बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे के अनुसार अनाथलय में पलनेवाले बच्चों की कोई जाति-धर्म नहीं होता। लिहाजा उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इसलिए अनाथ बच्चों के लिए एक फीसदी आरक्षण देने का फैसला  लिया गया है।  निर्णयानुसार सरकारी नौकरी, कॉलेज में प्रवेश व अन्य सरकारी सुविधाओं में अब से आवेदन फार्म में एक कॉलम अनाथ का भी होगा। संबंधित भर्ती वर्ष में यदि अनाथ उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हुए तो यह आरक्षण आगे नहीं बढ़ाते हुए रिक्त पदों पर सामान्य वर्ग की मेरिट लिस्ट के अनुसार भर्ती की जाएगी। यह आरक्षण स्कॉलरशिप, छात्रावास, व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति में भी लागू होगा। अनाथ आरक्षण प्रमाणपत्र पर किसी युवक को नियुक्ति के वक्त पेश प्रमाणपत्र की जांच आयुक्त, महिला व बाल विकास पुणे के मार्फत करना आवश्यक होगा।
इसी तरह जिन बच्चों के दस्तावेजों  पर किसी जाति का उल्लेख नहीं होगा या जिनके मां-बाप, चाचा-चाची, दादा-दादी के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी, ऐसे बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकारी नौकरी में यह आरक्षण खुले वर्ग में ए श्रेणी से ले कर डी श्रेणी की नौकरियों में सभी पदों पर लागू होगा। अनाथ बच्‍चों को सरकारी नौकरी का फॉर्म भरते वक्‍त काफी दिक्‍कत आती है। उन्‍हें अपनी जाति का पता न होने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता,  यैसे मामलों में भी बच्चों को लाभ मिलेगा।
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