नर्मदा और किसान बचाओ जंग की पुकार, किसानों का एल्गार

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मुंबई- समाजसेविका मेधा पाटकर ने नर्मदा और किसान बचाओ जंग आंदोलन का एेलान किया है। इस आंदोलन में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने का दावा किया गया है। इसी महीने की 29 तारीख को मध्यप्रदेश के इंदौर के खलघाट ( मुंबई हाइवे) से आंदोलन की शुरूआत होगी, जिसका 4 जून को भोपाल में जन अदालत के साथ समापन होगा। इस आंदोलन में आदिवासी, किसान, मज़दूर, मछुआरे शामिल होंगे।

एक जून सीहोर में शाम की आमसभा के बाद दो जून से पद यात्रा की शुरूआत होगी जो चार जून को भोपाल पहुंचेगी। भोपाल में जन अदालत होगी। भूतभूर्त न्यायाधीश मामले की सुनवाई करेंगे और अपना फैसला देंगे। इस आदोलन में विभिन्न संगठनों की सहभागिता होगी-मेधा पाटकर

मेधा के मुताबिक 29 मई की शाम 6 बजे खलघाट ( इंदौर मुंबई हाइवे) में आमसभा और 30 मई से जगह-जगह पर अपने मुद्दों को उठाने लोग पहुंचेंगे। इसीतरह 31 मई को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के पास लोग जमेंगे। एक जून सीहोर में शाम की आमसभा के बाद दो जून से पद यात्रा की शुरूआत होगी जो चार जून को भोपाल पहुंचेगी। भोपाल में जन अदालत होगी। भूतभूर्त न्यायाधीश मामले की सुनवाई करेंगे और अपना फैसला देंगे। इस आदोलन में विभिन्न संगठनों की सहभागिता होगी। नदियों के पानी का शहर, उद्योग और कंपनियां दोहन कर रही हैं। नर्मदा घाटी में सूखे का संकट निर्माण हो गया है। मेधा के अनुसार नर्मदा आंदोलन की जंग लंबे समय से चल रही है। नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर से लेकर बर्गी तक के बांधो में हज़ारों हेक्टेयर जंगल

डुबोकर, अवैध रेत खनन किया जा रहा है। नर्मदा का पानी मध्य प्रदेश की कई नदियों में और कंपनियों, शहरों की ओर मोड़कर, नर्मदा नदी बर्बाद की जा रही है। नर्मदा को लेकर चल रही सियासत से नदी किनारे बसे गांव के किसान, मछुआरे, गांव और शहर के निवासी अपनी पीढ़ियों की धरोहर को खो बैठने का संकट झेल रहे हैं। ऊर्जा और अन्य बड़ी लिंक परियोजनाएं, औद्योगिक क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने की सियासत चल रही है। घाटी को वंचित करके, विस्थापितों का पुनर्वास न करने से मध्य प्रदेश के निमाड़ से लेकर गुजरात के भरूच तक हाहाकार मचा हुआ है। मेधा के अनुसार मध्य प्रदेश सहित देशभर के किसानों की खेती प्रकृति पर निर्भर है। मछुआरे, पशुपालक, आदिवासियों की आजीविका पर संकट निर्माण हुआ है। मध्य प्रदेश में प्रतिदिन 5 किसानों की आत्महत्याएं होती हैं। पूर्ण क़र्ज़ माफी, प्राकृतिक और उपज का सही दाम दिए बिना यह सिलसिला नहीं रुकेगा।

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