सूखे इलाकों को लेकर भी सरकारी घपले – कांग्रेस  

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मुंबई- राज्य के अधिकांश जिलों में भीषण सूखा पड़ा हुआ है। लेकिन सरकार की सूची में केवल आठ तहसीलों को ही सूखा प्रभावित तहसील में शामिल किया गया है। सरकार के अधिकारी और संबंधित विभाग किस तरह की मनमानी और लापरवाही बरत रहे हैं, यह इस सूची को देखकर पता चलता है। यह आरोप विधानसभा में विरोधी पक्षनेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने लगाया है। विखे पाटील ने मांग की है सूखाग्रस्त गांवों को शामिल किए जानेवाले नियमों को शिथिल कर आपदाग्रस्त गांव के किसानों को फौरन राहत देने का कार्य किया जाए। फसल नुकसान की भरपाई और अनुदान की रकम का भुगतान करने का आदेश भी जारी करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से राज्य सरकार के अधिकारियों की लापरवाही को रेखांकित किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से जो सूची बनाई गई है, उसमें यवतमाल जिले की पांच, वाशीम जिले की एक और जलगांव जिले की दो तहसीलों को रबी फसल के लिए मध्यम स्वरूप का सूखाग्रस्त इलाका होने की बात कही गई है।
पाटील ने कहा कि असंवेदनशीलता दिखाने के साथ ही किसानों से भी धोखाधड़ी करने का प्रयास किया जा रहा है। सूखाग्रस्त समस्या के संदर्भ में विखे पाटील ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल राज्य के सूखा प्रभावित तहसीलों में राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। गुरुवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विखे पाटील ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से राज्य सरकार के अधिकारियों की लापरवाही को रेखांकित किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से जो सूची बनाई गई है, उसमें यवतमाल जिले की पांच, वाशीम जिले की एक और जलगांव जिले की दो तहसीलों को रबी फसल के लिए मध्यम स्वरूप का सूखाग्रस्त इलाका होने की बात कही गई है। विखे पाटील ने कहा कि यैसा निर्णय लेने से पहले राज्य सरकार ने राज्य की कई तहसीलों की अनदेखी की है। किसानों के साथ अन्याय किया है। विखे पाटील ने कहा कि आठ तहसीलों को मध्यम प्रकार के सूखाग्रस्त तहसील घोषित करने के दौरान सरकार ने बरसात में होनेवाली औसत कमी, लगातार गिर रहे भूजल स्तर, मृदू आर्द्रता जैसे घटकों का विचार किया है। लेकिन राज्य के अन्य जिलों और तहसीलों में भी इसी पैमाने को लागू करते हुए सूखाग्रस्त जिला और तहसील घोषित किया जाना चाहिए था।
विखे पाटील के मुताबिक राज्य सरकार ने आज तक सूखाग्रस्त तहसीलों के लिए जितनी भी योजनाएं घोषित की हैं, उन योजनाओं को शत प्रतिशत किसी भी तहसील में लागू नहीं किया जा सका है। सूखाग्रस्त इलाकों में सरकार की ओर से केवल कोरे आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा। अनुदान की रकम भी किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्ष 2015 में खरीफ फसल के लिए नागपुर खंडपीठ के आदेशानुसार सरकार को विदर्भ के 11 हजार 862 गांवों को सूखाग्रस्त भाग घोषित करना पड़ा था। इसी तरह वर्ष 2017 में भी खरीफ फसल के लिए सरकार को सुखाग्रस्त तहसीलों और गांवों के लिए आर्थिक मदद पहुंचाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन आज तक संबंधित गांवों के किसानों को सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ नहीं मिल सका है। इसके अलावा साल 2017 में नागपुर शीतसत्र के दौरान भी राज्य सरकार ने विधानसभा में कपास के बोंडअली और धान की फसल पर लगनेवाले मावा, तुडतुड़ रोग से होनेवाले नुकसान की भरपाई करने का आश्वासन दिया था। लेकिन आर्थिक मदद आज तक किसानों तक नहीं पहुंच पाई।
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