किसानों को ठगा तो नपेंगी बीज कंपनियां !

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मुंबई- विदर्भ और मराठवाडा के किसानों को लेकर राज्य सरकार सक्रिय हो गई है। खासकर कपास उत्पादक किसानों के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कपास के गुलाबी बोंडअली पर होनेवाले रोग को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों, घटकों और मशीनरी को एकजुट होकर और सामंजस्य के साथ काम करने का सख्त निर्देश दिया है। इधर कृषि मंत्री पांडुरंग फुंडकर ने सख्त हिदायत दी है कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करनेवाली बीज कंपनियों को नहीं बख्सा जाएगा। यदि किसानों को ठगा गया तो कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।
कृषि मंत्री फुंडकर ने कहा कि नकली बीज बेचनेवाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। आगे से किसानों के साथ धोखाधड़ी न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग बीज सप्लाई करनेवाली कंपनियों पैनी नजर रख रहा है।
नागपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग नियोजन केंद्र के डॉ. एसपी रायचौधरी सभागृह में कपास के गुलाबी बोंडअली के प्रबंधन-उपाययोजना के संदर्भ में रविवार को विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर कपास रोग के निदान पर प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ भी मौजूद थे। महाराष्ट्र में कपास का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। कपास उत्पान से बड़े पैमाने पर राजस्व मिलता है। बेमौसम बारिश से कपास उत्पादक किसान मुश्किलों में है। जबकि सरकार का दावा है कि ओलावृष्टि से बाधित किसानों को नुकसान भरपाई का भुगतान किया जा रहा है। कृषि मंत्री फुंडकर ने कहा कि नकली बीज बेचनेवाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। आगे से किसानों के साथ धोखाधड़ी न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग बीज सप्लाई करनेवाली कंपनियों पैनी नजर रख रहा है। किसानों को साथ धोखाधड़ी करनेवाली कंपनियों पर कठोर कार्रवाई होगी। यह बैठक तकरीबन साढ़े तीन घंटे तक चली।
मुख्यमंत्री के मुताबिक कपास की गुलाबी बोंडअली पर होनेवाले दुष्परिणाम को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों और मशीनरी का एकजुट होकर आपसी सामंजस्य के साथ काम करना जरूरी है। बोंडअली पर होनेवाले दुष्परिणाम को रोकने की सूचना किसानों तक पहुंचाई जाए। इसलिए सावधानीपूर्वक काम करें। आगामी काल में इसतरह की समस्या निर्माण न हो, इसके लिए विशेष उपाययोजना बनाने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। कार्बनिक खेती सबसे उपयुक्त है। इस खेती और सामूहिक खेती की संकल्पना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गुजरात के किसानों को भी संकट का सामना करना पड़ा। वहां योजनाबद्ध तरीके से सभी संबंधित विभागों ने सामंजस्य के साथ और समय पर काम किया, जिसके कारण सफलता मिली।
पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्याल के उपकुलपति डॉ. विलास भाले और गुजरात के कृषि विभाग के उपनिदेशक पीबी खिस्तारिया ने गुलाबी बोंडअली का दुष्परिणाम रोकने के लिए बनाई गई विभिन्न उपाययोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। पाया गया है कपास के रोग को रोकने के लिए नीम कारगर औषधि साबित हो रही है। किसान डॉ. नंदकिशोर तोटे और सडक अर्जुनी के किसान देवाजी बनकर ने किसानों को होनेवाली समस्याओं की जानकारी दी।
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