वर्ष 2011 तक के झोपड़ाधारकों को मिलेगा पक्का मकान

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मुंबई- झोपड़पट्टी में रहनेवाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने वर्ष 2011 तक के झोपड़ों को पात्र करने के फैसले को हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपात्रों को घर देने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया गया है।
शर्त होगी कि वे 10 वर्ष तक वह मकान नहीं बेच सकेंगे। घरों की कीमत म्हाडा के रेडी रेकनर और निर्माण खर्च के अनुसार तय की जाएगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2011 तक के झोपड़ों को पात्र करने का निर्णय लिया था। विधेयक मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया है।
शासनादेश के अनुसार वर्ष 2001 से 2011 तक के अपात्र झोपड़ा धारकों को सशुल्क घर दिया जाएगा। हालांकि शर्त होगी कि वे 10 वर्ष तक वह मकान नहीं बेच सकेंगे। घरों की कीमत म्हाडा के रेडी रेकनर और निर्माण खर्च के अनुसार तय की जाएगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2011 तक के झोपड़ों को पात्र करने का निर्णय लिया था। विधेयक मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। मुंबई में साढ़े तीन लाख झोपड़ों में रह रहे 18 लाख झोपड़ाधारकों के लिए यह राहत देनेवाला फैसला है।
सरकार ने इस आशय का शासनादेश गुरूवार को जारी किया। वर्ष 2000 तक के झोपड़ाधारकों को सरकार ने मुफ्त में घर देने का निर्णय लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2022 तक सभी बेघरों को घर देने के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार म्हाडा और एसआरए की मदद से प्रयास कर रही है। इस योजना के तहत घर लेनेवालों में वर्ष 2001 के बाद के झोपड़ाधारकों को शुल्क अदा करना होगा। जबकि उससे पहले के झोपड़ाधारकों को घर मुफ्त मिलेगा। दस साल से पहले घर बेचनेवालों पर कार्रवाई हो सकती है।
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