शरद पवार आधे घंटे तक रहे कैद सतरा के सभाग्रह में

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हाल का दरवाजा अचानक हो गया लॉक

मुंबई- एनसीपी सुप्रिमो और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार महाराष्ट्र के सातारा जिले के एक सभागृह में तकरीबन आंधे घंटे तक कैद रहे। दरअसल मामला यह हुआ कि हाल का दरवाजा अचानक लॉक हो गया और पवार बंधक बनकर रह गए। करीब आधें घंटे की मश्क्कत के बाद दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। हालांकि उन्होंने स्थिती को संभालते हुए कहा कि यह राजवंशों के इलाके का दरवाजा है, यैसे नहीं टूटेगा।
बुधवार को पार्टी मुखिया शरद पवार सातारा में थे। पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की और कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। सातारा की प्रख्यात रयत शिक्षण संस्था ने कर्मवीर भाउराव पाटिल की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का आयोजन किया था। पवार इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सातारा पहुंचे थे।
छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज उदनराजे भोसले सातारा से एनसीपी के सांसद हैं। इसीतरह शिवाजी महाराज के वंशज शिवेंद्रराजे भोसले एनसीपी के विधायक हैं। यह बात अलग है दोनों में राजनीतिक विरासत को लेकर टकराव होता रहता है। बुधवार को पार्टी मुखिया शरद पवार सातारा में थे। पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की और कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। सातारा की प्रख्यात रयत शिक्षण संस्था ने कर्मवीर भाउराव पाटिल की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का आयोजन किया था। पवार इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सातारा पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था। इसी बीच हाल का दरवाजा लॉक हो गया। दरवाजे को खोलने के अनेक प्रयास किए गए, पर सफलता नहीं मिली। बाद में सभागार का दरवाजा तोड़कर पवार और पत्रकारों को बाहर निकाला गया। पवार राजनीति के गुरू माने जाते हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि उन्होंने पवार की उंगली पकड़कर सियासत सीखी है। पवार ने स्थिती को भांपते हुए जवाब दिया कि यह राजवंशों का दरवाजा है, आसानी से नहीं टूटेगा। परंतु वे दरवाजे का हल निकालकर रहेंगे।
रमेश कराड ने वित्तीय हालात के कारण लिया नामांकन वापस – पवार 
इस बीच पवार ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे का खुलकर बचाव किया। पवार ने कहा कि विधान परिषद की उस्मानाबाद-बीड-लातूर निकाय संस्था के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार रमेश कराड द्वारा नामांकन वापस लेने पर धनंजय मुंडे को मुंह की खानी की बात बेतुका है। यह चर्चाएं केवल सोशल मीडिया और विऱोधी कर रहे हैं। रमेश कराड को धनंजय की जिद्द पर उम्मीदवारी देने की बात झूठी है। पवार के मुताबिक परभणी की सीट एनसीपी की थी परंतु वह एक ही जिले का चुनाव था। लेकिन बीड की सीट तीन जिलों के दायरे में होने कारण हम वहां पहुंच सकते थे, इसलिए हमने थोड़ा सा साहस दिखाते हुए यह सीट ली। परंतु आर्थिक ताकत न होने का हवाला देते हुए वहां के पार्टी उम्मीदवार कराड ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उम्मीदवार का कहना था कि आर्थिक हालात को देखते हुए वे चुनाव नहीं लड़ सकता। याद दिला दें कि महिला व बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे रमेश कराड को मुंह बोला भाई मानती थी। कराड ने भाजपा का साथ छोड़कर एनसीपी से नामांकन पत्र दाखिल किया था। आखिरी दिन कराड ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
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