#teacherssalary : Tawde accuses Patil for playing games!!

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मुंबई जिला बैंक को लेकर गरमाई राजनीति, 
शिक्षा मंत्री ने लगाया कपिल पाटिल पर शिक्षकों को बरगलाने का आरोप 
 
मुंबई- भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर की अगुवाई वाली मुंबई जिला सहकारी बैंक (एमडीसीबी) के माध्यम से शिक्षकों का वेतन देने के मामले को लेकर सियासत गरमाती नजर आ रही है। शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े और शिक्षक संगठन के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि शिक्षा मंत्री ने सफाई दी है कि बांबे हाईकोर्ट के आदेश का सरकार पालन करेगी। कोर्ट के फैसले की मूल प्रति मिलने के बाद, विधि और न्याय विभाग के अभिप्राय के अनुसार कार्य़वाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए राजनीतिक नौंटकी कर रहे हैं। 
 
तावड़े ने बताया कि शिक्षकों के पुराने बैंक खातों को नए बैंक में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के कारण थोड़ा वक्त लग रहा है। लिहाजा जिस तरह ठाणे में शिक्षकों को वेतन दिया गया, उसीतरह मुंबई में भी शिक्षकों को मिल सकेगा। तावड़े ने शिक्षक भारती के एमएलसी कपिल पाटिल पर निशाना साधते हुए कहा कि पाटिल ने यूनियन 
बैंक आफ इंडिया से वेतन देने की जिद्द पकड़ रखी है। पाटिल राजनीतिक हेतू साधने के लिए शिक्षकों को छल रहे हैं और मुझ पर भी झूठे आरोप लगा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि सबसे जरूरी है शिक्षकों को वेतन मिले। शिक्षकों का नुकसान न हो और हाई कोर्ट के आदेश का पालन हो। शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देना राज्य सरकार की प्राथामिकता है। परंतु कुछ लोग चुनाव नजदीक आने पर राजनीतिक नौंटकी कर रहे हैं। 
 
क्या है मामला 
शिक्षकों को पहले यूनियन बैंक मार्फत वेतन मिलता था। नए में सरकार ने एमडीसीबी में वेतन के लिए खाता खुलवाने का निर्देश जारी कारी किया था। मुंबई में 27,000 शिक्षक हैं। इनमें से 15,000 शिक्षकों पगार मिल गई है। जबकि 12,000 शिक्षकों ने एमडीसीबी में खाता खुलवाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें वेतन के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों को एमडीसीबी में खाता खुलवाने कहा गया था। सरकार के फैसले के खिलाफ शिक्षकों के संगठन शिक्षक भारती ने याचिका दायर की थी। सरकारी आदेश में कहा गया था कि जब तक एमडीसीबी में खाता नहीं खुलवाया जाता, तब तक कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जाएगा। इस विवाद के कारण हजारों शिक्षकों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला था। 
 
सरकार को फटकार 
न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश बीपी कोलाबावाला की खंडपीठ ने शिक्षा मंत्री तावड़े को आड़े हाथ लेते हुए फैसले को ‘गैर तर्कसंगत’ बताया है। खंडपीठ ने कहा, ‘जब आप (तावडे) विपक्ष में थे, तो आपने ही इस बैंक के विरुद्ध आरोप लगाए थे। अब अचानक यह बैंक अच्छी कैसे बन गई। सरकार शिक्षकों को बाध्य नहीं कर सकती। याद दिला दें कि मुंबई जिला बैंक के भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर कर्ता-धर्ता हैं। बैंक पर 123 करोड़ रुपए घोटाले का आरोप भी लग चुका है। हालांकि दरेकर का कहना है घोटाले के आरोपों में कोई तथ्य नहीं है। बैंक पारदर्शी कामकाज के बल पर दिनों-दिन प्रगति कर रही है। शिक्षकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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