सीएसटीएम ब्रिज हादसा: स्ट्रक्चरल ऑडिटर्स काली सूची में

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मुंबई। सीएसटीएम ओवर ब्रिज हादसे में दो इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और तीन इंजीनियरों के विरूद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही पुल का स्ट्रक्चरल ऑडिट करनेवाले कंपनी को काली सूची में डाल दिया गया है। विजिलेंस विभाग ने कंपनी को पैनल से बाहर का रास्ता दिखाने की सिफारिश की है।  
दो इंजीनियर निलंबित, तीन इंजीनियर की विभागीय जांच 
इस हादसे की जांच के लिए बीएमसी आयुक्त अजोय मेहता ने एक समिति का गठन किय़ा था। इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट शुक्रवार को मनपा आयुक्त को सौंपी। विजिलेंस विभाग ने हिमालय पादचारी पुल हादसे के लिए मनपा प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। इस हादसे के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिटर्स को भी ब्लैक लिस्ट में डालने और उसे पैनल लिस्ट से बाहर निकालने की सिफारिश की है। पुल की मरम्मत करने वाले ठेकेदार को भी कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। जांच में पाया गया है कि ऑडिटर्स की सलाह के बाद मेसर्स आरपीएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को वर्ष 2012-14 तक 2 साल के लिए स्ट्रक्चर मरम्मत का ठेका दिया गया था। मरम्मत कार्य के लिए ठेकेदार के पास पर्याप्त मानव बल और देखरेख क्षमता उपलब्ध नहीं थी। वर्ष 2013-14 और वर्ष 2017-18 में पुल की स्ट्रक्चरल ऑडिट के जांच का जिम्मा भी मनपा को था, परंतु रिपोर्ट का सुपरविजन करने में लापरवाही बरती गई है। विजिलेंस ने मनपा के तत्कालीन मुख्य इंजीनियर एसओ कोरी(सेवानिवृत्त), तत्कालीन उप मुख्य इंजीनियर(पुल) आरबी तरे, तत्कालीन कार्यकारी इंजीनियर एआर पाटिल और एआई इंजीनियर के साथ ही तत्कालीन सहायक इंजीनियर (ब्रिज) एसएफ काकुलते के खिलाफ गहन विभागीय जांच की सिफारिश की है। विजिलेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंसल्टेंट कंपनी ने पुल के निर्माण अवधि के बारे में मनपा प्रशासन को गुमराह किया था। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में हिमालय पुल को खतरनाक व जर्जर सूची में नहीं डाला और इसे अच्छा बताया था लेकिन 6 महीने में ही यह पुल गुरुवार को गिर गया। इस हादसे में 6 की मृत्यू और 31 लोग घायल हुए हैं। 
 
विजिलेंस विभाग ने ठेकेदार आरपीएस इंफ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लिमिटेड कंपनी को वर्ष 2012-14 के दौरान पुल की घटिया मरमत कार्य के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विजिलेंस ने स्ट्रक्चरल ऑडिटर प्रो. डीडी देसाई एसोसिएटेड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट एंड एनालिस्ट प्रा. लिमिटेड को भी तत्काल प्रभाव से मनपा के स्ट्रक्चरल ऑडिट पैनल से बाहर कर दिया है। स्ट्रक्चरल ऑडिटर कंपनी को काली सूची में डालने के बाद कंपनी को दिए गए सभी ठेके भी रद्द कर दिए गए हैं। स्ट्रक्चरल ऑडिटर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित कंपनी ने 29 अगस्त 2016 को जिन पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया था, उन पुलों का दोबारा स्ट्रक्चरल ऑडिट होगा। मनपा प्रशासन फिलहाल 374 पुलों की देखभाल कर रहा है। विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट में मुंबई शहर व उपनगरों के सभी प्रमुख पुलों की जांच के लिए विशेष रूप से ब्रिज निरीक्षक को नियुक्त करने और अगले एक महीने में खतरनाक पुलों की रिपोर्ट निदेशक (ईएसएंडपी) के समक्ष पेश करने को कहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद मनपा आयुक्त अजोय मेहता ने विजिलेंस कमेटी को जांच का जिम्मा सौंपा था।
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