#gutkhaban : FDA Officer suspended for threatening Munde’s OSD!

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नेता के ओएसडी को धमकाना पड़ा भारी, नप गया अधिकारी 
 
मुंबई- खाद्य विभाग के एक अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष के ओएसडी को धमकाना भारी पड़ा है। उस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। दरअसल मामला विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे से जुड़ा हुआ है। मुंडे का आरोप है विधान भवन जैसे अति संवेदनशील स्थान में आकर भिवंडी के खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरडी आकरूपे ने उनके विशेष कार्य अधिकारी (ओसएसडी) को धमकाया। अधिकारी आकरूपे भाजपा विधायक के साथ आए थे। इस मामले को लेकर विधान परिषद में हंगामा होने के बाद आकरूपे को निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार को सदन में रसद मंत्री गिरीश बापट ने आकरूपे को निलंबित करने की घोषणा की। 
 
OSD, Dhananjay Munde

सदन में धनंजय मुंडे ने मुद्दा उठाया कि बीते सप्ताह उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत अवैध तरीके से गुटखा बेचे जाने का मुद्दा उठाया था। मुंडे ने कहा कि इससे नाराज राज्य सरकार के खाद्य व आपूर्ति विभाग के अधिकारी आकरूपे, उदगीर के भाजपा विधायक डा. सुधाकर भालेराव के साथ विधान भवन में आए। उन्होंने मेरे कार्यालय में आकर मेरे ओएसडी को धमकी दी। मुंडे ने कहा कि बजट सत्र शुरू है। बावजूद इसके सरकारी अधिकारी आकर मेरे ओएसडी को धमकी देने की हिम्मत कर रहे हैं। सरकार बताए कि क्या हम अधिकारियों के भ्रष्टाचार का मुद्दा भी सदन में न उठाए। मुंडे ने आकरूपे के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होने कहा कि यदि इसी तरह से सदन का कामकाज चलता रहा, उन्हें काम करने की इच्छा नहीं है। शेकाप के जयंत पाटिल ने मुंडे का समर्थन करते हुए कहा कि घटना बेहद गंभीर है। सरकार को आकरूपे के खिलाफ कार्रवाई के बारे में शीघ्र फैसला लेना चाहिए। इस बीच एनसीपी के किरण पावसकर ने कहा कि आकरूपे जिस भाजपा विधायक को साथ लेकर आए थे। उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर सभापति रामराजे निंबालकर ने कहा कि मैं समय आने पर उचित फैसला लूंगा। 

 
सभापति रामराजे नाईक निंबालकर ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी अधिकारी द्वारा इसतरह की हिम्मत करने की घटना विधानमंडल के कामकाज व व्यवस्था के लिए धोखादायक है। इस बीच विपक्ष के सदस्यों ने आकरूपे को निलंबित करने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे और शोरकगुल के बीच सदन कामकाज दो बार रोकना पड़ा। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर मंत्री बापट ने आकरूपे के निलंबन की घोषणा की। इसके बाद विपक्ष का गुस्सा शांत हुआ।
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