थैलेसीमिया बीमारी पर अंकुश लगाने छेड़ेगें जागरूकता अभियान 

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मुंबई- थैलेसीमिया बीमारी के बढ़ते प्रमाण को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदेश में जागरूकता अभियान छेड़ने का फैसला किया है। साथ ही मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने, मांग के अनुसार दवा की आपूर्ति बढ़ाने का निर्देश सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्यमंत्री विजय देशमुख ने विभागीय अधिकारियों को दिया है।
थैलेसीमिया यह खून की एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी है। इस रोग से मरीज के रक्त में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबीन तैयार नहीं हो पाता। मरीज को लगातार रक्त संक्रमण होता है। लाल कोशिकाएं नष्ट होती जाती है, जिसके कारण शरीर के अंगों में लोहे की मात्रा जरूरत से ज्यादा जमा हो जाती है। इस बीमारी के थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर दो प्रकार हैं।
राज्यमंत्री देशमुख ने शुक्रवार को मंत्रालय में थैलेसीमिया बीमारी के संबंध में राज्य की स्थिती का जायजा लिया है। समीक्षा बैठक में समाजसेवी संस्था, स्त्रीरोग विशेषज्ञों की FOGSI संगठन के पदाधिकारी, थैलेसीमिया मरीजों के अभिभावक और संबंधित आला अधिकारी मौजूद थे। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि मरीजों की असली संख्या कितनी है, इसकी जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया। दरअसल सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार राज्य में थैलेसीमियाग्रस्त मरीजों की संख्या लगभग 8 हजार 508 है। परंतु बैठक में यह संख्या करीब 30 हजार होने की संभावना व्यक्त की गई। देशमुख ने मरीजों की सही संख्या सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधितों को दिया। बैठक में मांग की गई कि मौजूदा समय में केवल 6 केंद्रों पर थैलेसीमियाग्रस्त रोगियों को मुफ्त में गोलियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। थैलेसीमियाग्रस्त मरीज राज्यभर में हैं, इसलिए पूरे प्रदेश में दवा की आपूर्ति की जानी चाहिए। देशमुख ने राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गोलियों की आपूर्ति करने की योजना बनाने और मांग के अनुसार हाफकीन संस्था से दवा प्राप्त करने के लिए शीघ्र पंजीकरण कराने का निर्देश दिया। मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसका विशेष ख्याल रखने की हिदायत अधिकारियों को दी गई है। सभी रोगियों को उनके गांव के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त गोलियां मिल सकें, इस दृष्टिकोण से योजना बनाने और मरीजों को सप्ताह के बजाए महीने भर की दवा एक साथ देने कहा गया है। इसके अलावा उन्होंने रोगियों को विकलांगता प्रमाणपत्र देने के संबंध में केंद्र सरकार की नियमावली के अनुसार कार्यवाही करने का सुझाव भी विभाग के अधिकारियों को दिया।
 
अंकुश लगाने जागरूकता अभियान 
राज्यमंत्री देशमुख ने कहा कि थैलेसीमिया बीमारी का प्रमाण बढ़ रहा है। बच्चों में यह बीमारी अधिक पाई जाती है। गर्भावस्था के दौरान यदि ख्याल रखा जाए तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया की माइनर जांच कराना अच्छा होता है। यदि एक गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन का प्रमाण कम मिलता है, तो डॉक्टरों को भी थैलेसीमिया की जांच करा लेने के लिए सजग रहना जरूरी है। इस बीमारी की बढ़ने और उसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, बड़ा जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया गया है।
 
 क्या है थैलेसीमिया रोग ?
थैलेसीमिया यह खून की एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी है। इस रोग से मरीज के रक्त में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबीन तैयार नहीं हो पाता। मरीज को लगातार रक्त संक्रमण होता है। लाल कोशिकाएं नष्ट होती जाती है, जिसके कारण शरीर के अंगों में लोहे की मात्रा जरूरत से ज्यादा जमा हो जाती है। इस बीमारी के थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर दो प्रकार हैं। थैलेसीमिया माइनर व्यक्ति का विवाह शैलेसीमिया माइनर अथवा थैलेसीमिया मेजर जोड़ीदार के साथ न करने की सलाह दी जाती है। थैलेसीमिया बीमारी के दो लोगों की शादी होने पर थैलेसीमियाग्रस्त बच्चे का जन्म होने की संभावना 75 प्रतिशत होती है। इसलिए गर्भवती माता को अन्य जांच के साथ थैलेसीमिया माइनर की भी जांच कराने की सलाह विशेषज्ञ डॉक्टर देते हैं।
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