व्यापारियों को चाहिए कर्ज माफी, दी आंदोलन छेड़ने की धमकी

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आंदोलन की रणनीति बनाने बुलाई बैठक 

मुंबई- किसान ऋण माफी की तरह अब कारोबारियों को भी कर्ज माफी चाहिए। व्यापारियों ने इसके लिए सरकार को देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की धमकी दी है। आंदोलन की दिशा और दशा तय करने के लिए भोपाल में 12 और 13 जनवरी को दो दिवसीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पूरे देश से व्यापारी संगठन से जुड़े पदाधिकारी शामिल होंगे। 

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की अगुवाई में यह बैठक बुलाई है। कैट के मुताबिक पहले कॉर्पोरेट सेक्टर और बड़े उद्योग, किसानों की क़र्ज़ माफ़ी  देना देश की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका है। देश के करोड़ों करदाताओं के साथ विश्वासघात है। यदि इसी तरह कर्ज़ माफ़ी जारी रही तो देश के 7 करोड़ व्यापारियों में से जिन्होंने क़र्ज़ लिया हुआ है उनका भी कर्जा माफ किया जाना चाहिए और करों में रियायतें दी जाएं। कैट ने इस मुद्दे पर एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में व्यापक विचार करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए कैट ने अपनी राष्ट्रीय गवर्निंग कॉउन्सिल की एक मीटिंग आगामी 12 -13 जनवरी को भोपाल में बुलाई है, जिसमें देश के सभी राज्यों के बड़े व्यापारी नेता भाग लेंगे। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक क़र्ज़ माफ़ी राजनैतिक दलों का वोटों का कारोबार है।

अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका

संविधान में किसी भी सरकार को अधिकार नहीं है कि वो अपनी मनमर्जी से देश के कोष से इस प्रकार कर्जा माफ़ करके बैंकों पर बोझ डाले और  बैंकिंग प्रणाली को तहस नहस कर दें। इससे बैकों की एनपीए बढ़ जाती है। कर्ज माफी से देश आर्थिक विषमता का शिकार होता है और सरकार नीतिगत रूप से लाचार बन जाती है। देश केकरोड़ों करदाता देश के विकास की आशा में कर देते हैं न की मनमर्जी से वोटों का कारोबार करने के लिए कोई सरकार लुभावनी कर्ज माफी करे। ऋण माफ करने के बजाए वर्ग को सक्षम और मजबूत बनाया जाना चाहिए। अगर किसी भी सरकार को  क़र्ज़ माफ़ करना है तो वो अपने राजनैतिक दल के पैसे से करे न की सरकारी खजाने को मनमाने तरीके से लुटाए। 

4 प्रतिशत को ही बैंकों से कर्जा

कैट के अनुसार देश में 7 करोड़ छोटे व्यावसायी प्रति वर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपए  का व्यापार करते हैं,जिसमें से केवल 4 प्रतिशत को ही बैंकों से कर्जा मिलता है ! बाकी व्यापारी ऊंची ब्याज दरों पर अन्य साधनों से कर्जा लेते हैं। अब इस पर रोक लगना जरूरी है और व्यापारियों को आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए । कैट देश के सभी राज्यों में इस मुद्दे को लेकर एक बढ़ा आंदोलन चलाएगा। व्यापारी वर्ग सरकार के लिए बिना किसी पारिश्रमिक लिए राजस्व इकठ्ठा करने का काम करता है। अनेक प्रकार की कागजी कार्यवाही, जटिल क़र प्रक्रिया और उस पर होने वाले खर्च को व्यापारी वहन करता है। जरा सी भी त्रुटि हो जाने पर दंड व अन्य परेशानियों को भुगतता है। यदि कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए जिसमें व्यापारी को सबसे ज्यादा नुक्सान होता है तो आज तक उसके लिए कोई क़र्ज़ माफ़ी या अन्यसुविधा किसी भी सरकार ने नहीं दी है।  

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