फर्जी चुनाव घोषणा पत्र पर अंकुश लगाने की मांग

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मुंबई, व्यापारियों के राष्ट्रीय संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आगामी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र की मर्यादा को बरकरार रखने के लिए भारत चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर झूठे वायदों पर रोक लगाने की मांग की है। कैट ने कहा है फर्जी घोषणा पत्र केवल मतदाताओं को लुभाने का हथियार ही बन कर न रह जाए ।अगर चुनाव आयोग इस ओर कोई कदम नहीं उठाएगा तो कैट इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।

चुनावी घोषणा पत्र महज लोगों को लुभाने के लिए जारी किए जाते हैं – खंडेलवाल

चुनावी घोषणा पत्र राजनैतिक दलों का देश की जनता के प्रति निश्चित रूप से पूरे किये जाने वाले वादों के दस्तावेज होते हैं, अक्सर राजनैतिक दल सत्ता प्राप्त करने के बाद अपने ही चुनावी घोषणा पत्र को भूल जाते हैं। उन्हें अपने वायदों का कोई ध्यान ही नहीं रहता । देश के राजनैतिक दलों को कटघरे में खड़े करते हुए कैट ने चुनाव घोषणा पत्र की पवित्रता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राय देखा गया है की वोटरों को लुभाने के लिए आम तौर पर राजनैतिक दल चुनावी घोषणा पत्र में बड़े और न पूरे होने वाले वायदे करते हैं और चुनाव समाप्त होते भूल जाते हैं । मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत को भेजे पत्र में कैट ने मांग की है कि चुनाव आयोग राजनैतिक दलों को दिशा-निर्देश जारी करे कि चुनावी घोषणा पत्र में केवल उन्ही मुद्दों अथवा वादों को शामिल किया जाए, जिनको पूरा करने में वे सक्षम हों । कैट ने यह भी मांग की है कि अपने चुनावी घोषणा पत्र में कही गई बातों के प्रति राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी तय की जाए और अगले चुनाव से पहले राजनैतिक दल अपने घोषणा पत्र में किये गए वायदों पर क्या किया, उसका लेखा-जोखा सार्वजानिक करें।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक अक्सर सत्तासीन दल अथवा विपक्ष अपने चुनावी घोषणा पत्र के प्रति गंभीर नहीं रहते और न ही उसको पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि चुनावी घोषणा पत्र महज लोगों को लुभाने के लिए जारी किए जाते हैं.
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