बढ़ा हवाई किराया, कारोबारियों ने जताया रोष 

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मुंबई।  हवाई किराया बढ़ाए जाने से नाराज व्यापारियों का राष्ट्रीय संगठन कान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) भी इस संघर्ष में कूद गया है। कैट ने कड़ा एेतराज जताया है कि विभिन्न एयरलाइन कंपनियों ने अपने हवाई किराए में अत्यधिक वृद्धि की है, जो किफायती मूल्य निर्धारण के सिद्धांत के खिलाफ है। इस संबंध में कैट ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु को एक ज्ञापन देकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और किराया नीति निर्धारित करने की मांग की है। 
किफायती मूल्य निर्धारण के सिद्धांत के खिलाफ – कैट
जेट एयरवेज बंद होने के बाद विभिन्न एयरलाइन कंपनियों द्वारा अपने हवाई किराए में की गई बढ़ोतरी का विरोध होने लगा है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक विभिन्न एयरलाइन कंपनियां बिना किसी ठोस तर्क अथवा बुनियादी ढांचे में किसी परिवर्तन के डायनामिक मूल्य नीति के बहाने अनुचित किराए ले रही हैं। किसी भी एक एयरलाइन में कुछ दिनों के भीतर एक ही सीट के लिए किराए का बड़ा अंतर हो जाता है, जो इस तथ्य को स्थापित करता है कि एयरलाइन अनुचित लाभ कमा रही हैं। इससे हवाई यात्रा करनेवाले व्यापारियों व सामान्य वर्ग को बेहद परेशानी हो रही है। केंद्रीय मंत्री प्रभु को ज्ञापन देकर उनका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया गया है कि पिछले कुछ महीनों में देशभर में हवाई यात्रा के किराए में अचानक अत्यधिक वृद्धि हुई है। जो गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह न केवल एक आम नागरिकों पर ज्यादा बोझ बढ़ाता है व्यापार और व्यापार के विकास के लिए एक गंभीर बाधा है।
यह मौजूदा स्थिति डायनामिक किराया मूल्य तंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ भी है। जेट एयरवेज के बंद होने के बाद अन्य एयरलाइंस मांग का अनुचित लाभ उठा रही हैं और अपने हवाई किरायों को अनैतिक रूप से बढ़ा रही हैं। बजट एयरलाइंस भी कीमतें बढ़ाने में आगे हैं।
 
भारतिया और खंडेलवाल के अनुसार देश के भीतर हवाई यात्रा कोई अधिक लग्जरी नहीं है, बल्कि कुशल और त्वरित गतिशीलता के लिए आवश्यक है। यह आर्थिक विकास को काफी बढ़ावा देती है। व्यापार और व्यापारिक समुदाय द्वारा की जानेवाली अधिकांश यात्रा की योजना पहले से नहीं होती है। वे अंतिम मिनट बुकिंग के लिए सहारा लेते हैं। वर्तमान परिदृश्य में, अंतिम मिनट के स्पॉट किराए में दिल्ली- मुंबई सेक्टर या दिल्ली- चेन्नई सेक्टर के लिए एक तरफ का हवाई किराया 20,000 रुपए हो रहा है, जो बिलकुल अविश्वसनीय है। कैट ने प्रभु को सुझाव दिया है कि हवाई किरायों पर नियंत्रण रखने के लिए एक मूल्य नियंत्रण तंत्र विकसित किया जाए। जो एयरलाइनों द्वारा लगाए जानेवाले किराए की ऊपरी सीमा पर नियंत्रण रखे। भले ही किराया प्रणाली डायनामिक है और मांग की आपूर्ति पर आधारित है। किराया बढ़ाने के लिए कुछ बुनियादी और मौलिक तर्क होने चाहिए। मनमाना और अत्यधिक मूल्य वृद्धि की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सरकार किराए के लिए अधिकतम सीमा तय कर सकती है। यह न केवल एयरलाइंस को अत्यधिक किराया वसूलने से रोकेगा, बल्कि हर आम नागरिक के लिए उड़ान सस्ती करने का एक मजबूत विकल्प होगा।
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