घोटाले में नपेंगे 650 अधिकारी और कर्मचारी   

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फौजदारी का मामला दर्ज

मुंबई- आदिवासी विकास विभाग में 104 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप में कुल 650 अधिकारियो, कर्मचारियों और ठेकेदारों पर गाज गिर सकती है। उनके खिलाफ फौजदारी का मामला दर्ज किया गया है और मामले की बांबे हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है। अदालत के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने घोटाले के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अटल मानी जा रही है।
सरकार ने मुंबई हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एमजी गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने वर्ष 2014 से 2017 के अलावा इससे पहले  आदिवासी विकास विभाग में हुए वित्तीय अनियमितता को लेकर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र में सदन में प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को जांच समिति गठित करने का आदेश दिया था। सरकार ने मुंबई हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एमजी गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने वर्ष 2014 से 2017 के अलावा इससे पहले  आदिवासी विकास विभाग में हुए वित्तीय अनियमितता को लेकर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र में सदन में प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। गायकवाड़ समिति की रिपोर्ट पर राय लेने के लिए पूर्व अधिकारी पीडी करंदीकर की अध्यक्षता में भी एक समिति का गठन किया गया है। जिसमें गायकवाड़ रिपोर्ट में दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट का पहला भाग सरकार को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में आदिवासी विभाग में भ्रष्टाचार रोकने के लिए की सुझाव और सिफारिशें की गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जनजातिय कल्याण योजनाओं के नाम पर पैसे निकालकर उसका सही इस्तेमाल नहीं किया गया है। अधिकारियों ने अपनी जेबें गरम की हैं। सिंचाई योजना, इंजिन, पाइप खरीदी, घरकुल योजना, जानवरों के टीके, गैस यूनिट, आश्रमशाला की इमारत व मरम्मत, स्कूलों की सामान खरीदी, आदिवासी युवक व युवतियों को साइकिल वितरण आदि के नाम पर कुल 104 करोड़ 48 लाख 28 हजार 267 का घोटाला किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने दोषियों पर कार्रर्वाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आदिवासी विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग के संशोधन एवं प्रशिक्षण संस्था की ओर से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई करने अलावा उनसे पैसे की भी वसूली की जाएगी।
साल 2004 से 2009 के बीच हुए घोटाले का लेखा-जोखा तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इस बीच 7,758 इंजिन खरीदी के नाम पर 14 करोड़ 89 लाख का घोटाला हुआ है। इंजिन को इंस्टाल करने के लिए ठेकदारों को 1 करोड़ 95 लाख रुपए ज्यादा दिए गए। इसीतरह 27,602 गैस यूनिट की खरीदी में 7 करोड़ 32 लाख और 25 हजार 527 गैस बर्नर की खरीदी में 3 करोड़ 65 लाख घोटाले का आरोप है। हालांकि समिति ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री को क्लीन चिट देते हुए उन पर कोई कार्रवाई नहीं करने की बात कही है।
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