वरुण- अनुष्का बने कौशल भारत अभियान का ब्राण्ड अम्बेसडर

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मुंबई-  फिल्म अभिनेता वरुण धवन और अदाकारा अनुष्का शर्मा अपनी बहु-प्रतीक्षित फिल्म ‘सूई-धागा- मेड इन इण्डिया’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों को कौशल भारत अभियान का ब्राण्ड अम्बेसडर बनाया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री  डाॅ धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है वरुण  और अनुष्का ने फिल्म सूई धागा के जरिए हमारे समाज के घरेलू कारीगरों और बुनकरों के कौशल को रोशनी में लाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्न मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप नव भारत के निर्माण में मदद करेंगे

धवन इस फिल्म में एक दर्ज़ी मौजी की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि अनुष्का उनकी पत्नी कढ़ाईकार ममता की भूमिका निभा रही हैं। बेहद मासूम और महत्वाकांक्षी इस जोड़े के सपने बहुत उंचे हैं जो अपना नाम रौशन करना चाहते हैं। मंत्री प्रधान के अनुसार फिल्म समाज को महत्वपूर्ण संदेश दे रही है। भारत में दुनिया की सबसे ज़्यादा युवा आबादी है और हमारे लिए गर्व की बात है देश के युवा अपने उद्यमिता कौशल के साथ दुनिया भर में नाम कमा रहे हैं। ‘दोनों कलाकार इस फिल्म के माध्यम से देश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण पाने और बेहतर आजीविका कमाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्न मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप नव भारत के निर्माण में मदद करेंगे। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तत्वाधान में कौशल भारत आधुनिक एवं पारम्परिक कौशल में व्यवसायिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करना चाहता है। मंत्रालय आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, ओद्यौगिक साझेदारियों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के  प्रयासों से हर साल 1 करोड़ से अधिक युवा कौशल भारत मिशन के साथ जुड़ रहे हैं। बेहतर आजीविका के द्वारा अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे है।

फिल्म के माध्यम से भारत के उद्यमियों, कुशल कारीगरों, खासतौर पर घरेलू कारीगरों, शिल्पकारों और बुनकरों को सलाम करते हैंँ, जिन्होंने दुनिया भर में देश का गौरव बढ़ाया है।  वरुण धवन के  अनुसार हमें गर्व है हम अपनी फिल्म सूई धागा के माध्यम से इस कौशल भारत अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। आत्मनिर्भरता एवं उद्यमिता का जश्न मना रहे हैं। अनुष्का शर्मा ने कहा कि कौशल भारत अभियान देश में कुशल और प्रतिभाशाली युवाओं को सहयोग प्रदान करने की पुष्टि करता है। सूई धागा बनाने के दौरान ऐसे कई प्रतिभाशाली, कुशल कारीगरों, बुनकरों की कहानियां हमारे सामने आईं, जिन्हें अपनी प्रतिभा को दर्शााने का सही मौका नहीं मिला है। कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति के माध्यम से कई नीतिगत बदलाव किए गए हैं। एप्रेन्टिसशिप अधिनियम 1961 में व्यापक बदलाव लाए गए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत रिकाॅग्निशन आॅफ प्रायर लर्निंग प्रोग्राम उन प्रतिभाशाली कामगारों की प्रतिभा को पहचानता है, जिनके पास पारम्परिक कौशल और सालों का अनुभव है और उन्हें असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र में लाने  लिए प्रयास करता है।

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