वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को भारतीय कारोबारियों ने बताया घातक  

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मुंबई। भारतीय कारोबारियों ने वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को भारतीय अर्थ व्यवस्था के लिए खतरा करार दिया है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स ने इस डील पर कड़ा एेतराज जताया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह डील वॉल्मार्ट रीटेल ट्रेड की ओर से भारतीय बाजार पर क़ब्ज़ा करने का छुपा एजेंडा है। इससे देश की अर्थ व्यवस्था पर विपरित परिणाम होगा और रीटेल कारोबार पर संकट निर्माण होने से बेरोजगारी की समस्या निर्माण होगी।
वॉल्मार्ट फ्लिपकार्ट डील में क़ानूनी रास्तों को तोड़ा मरोड़ा गया है। डील के अस्तित्व में आते ही एफडीआइ पॉलिसी का उल्लंघन होगा। एक असंतुलित प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा। वास्तव में इस डील के माध्यम से वॉल्मार्ट रीटेल ट्रेड पर क़ब्ज़ा करने के अपने छुपे एजेंडे को पूरा करेगा ।
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील को यदि रोका नहीं गया तो वो दिन दूर नहीं जब हर मार्केट में वालमार्ट की अपनी दुकान खुलेगी। ई कॉमर्स पर ही ऑर्डर लेकर उपभोक्ता के घर सामान की डिलीवरी हो जाएगी। इस काम में वालमार्ट की मोबाइल वैन शहर में जगह – जगह होगी। उपभोक्ताओं को बाजार आने ही नहीं दिया जाएगा। यैसे हालात में कारोबारियों का व्यापार खतरे में पड़ जाएगा। वॉल्मार्ट फ्लिपकार्ट डील में क़ानूनी रास्तों को तोड़ा मरोड़ा गया है। डील के अस्तित्व में आते ही एफडीआइ पॉलिसी का उल्लंघन होगा। एक असंतुलित प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा। वास्तव में इस डील के माध्यम से वॉल्मार्ट रीटेल ट्रेड पर क़ब्ज़ा करने के अपने छुपे एजेंडे को पूरा करेगा ।
खंडेलवाल के अनुसार वॉल्मार्ट कोई ई कामर्स कंपनी नहीं है। इस क्षेत्र में उसकी कोई विशेषता नहीं है फिर भी वॉल्मार्ट ने अपने असीमित संसाधनों के बल पर फ्लिपकार्ट से डील की है। इसके ज़रिए वह रीटेल बाज़ार में विदेशी उत्पादों का विशाल जाल बिछाएगा। सरकार को इस डील के सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। ये कोई दो कंपनियों के बीच का समझौता नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत के रीटेल बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। । इस डील में एफडीआइ पॉलिसी, डाँटा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा, अनुचित बिक्री आदि अहम मसले शामिल हैं। जो पोर्टल का स्वामी होता है, उसका डॉटा और डिजिटल दक्षता पर नियंत्रण रहता है। लिहाजा सारा डॉटा वॉल्मार्ट के नियंत्रण में होगा, जिसका दुरुपयोग भी हो सकता है। पोर्टल का स्वामी अपनी शर्तें किसी पर भी थोप सकता है। सरकार को भी विदेशी स्वामित्व वाली कंपनी पर नज़र रखना मुश्किल होगा।
खंडेलवाल बताते हैं कि बीते चार साल में सरकार ने घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक भी क़दम नहीं उठाया है। विदेशी कंपनियों को भारत में प्रवेश के नए रास्ते बनाए जा रहे हैं । वॉल्मार्ट फ्लिपकार्ट डील भारत के रीटेल व्यापार के लिए पनौती साबित होगी और अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा । बड़ी संख्या में बेरोज़गारी बढ़ेगी और अनुचित प्रतियोगिता का वातावरण बनेगा। उन्होंने कहा की अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित अन्य देशों में वित्तीय क़र्ज़ की दर 1.5 प्रतिशत से लेकर 2.5 प्रतिशत है, जबकि भारत में 12 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक है । क़र्ज़ की दर में इतना बड़ा अंतर घरेलू व्यापार को ख़त्म करने के लिए काफ़ी है। सरकार को घरेलू व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तुरंत एक कारगर नीति बनानी चाहिए।
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