जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए लगाई जाएगी ग्रील बाड़

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मुंबई- जंगली जानवरों के हमले से फसलों, पशु और मानव की जीवित हानि होती है। इन समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए वन विभाग ने डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जन वन विकास योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। जगंल क्षेत्र से सटे गांवों में वन प्राणियों से होनेवाले नुकसान को टालने के लिए वन की सरहद पर ग्रील बाड़ (चेन लिंक फेन्सिंग) लगाने की योजना बनाई गई है, जिसे पहले प्रायोगिक तत्व पर लागू किया जाएगा।
योजना के माध्यम से बाड़ के लिए धनराशि का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकारी अनुदान के रूप में दिया जाएगा। केवल 10 फीसदी निधि लाभार्थी को भरनी होगी। योजना के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। जिसमें जमीन पर अतिक्रमण न हो, उस जमीन पर कम से कम प्रति हेक्टर 100 पौधे, बांस लगा होना शामिल है।
योजना के तहत व्याघ्र परियोजना और बफर क्षेत्रों और अभयारण्यों, राष्ट्रीय पार्कों की सीमा से 5 किमी के संवदेनशील गावों में वन प्राणियों से फसलों को होनेवाले नुकसान को रोकने के लिए बाड़ लगाए जाएंगे। जहां ग्राम परिस्थितीकीय विकास समिति अथवा संयुक्त वन प्रबंधन समिति होगी, वहां उनके माध्यम से बांड़ लगाई जाएगी। जहां यह समितियां नहीं होंगी, वहां समिति का गठन करके योजना लागू की जाएगी। लोहे की जाली संघीय अथवा कतारबद्ध लगाई जाएगी। लाभार्थियों का चयन करते समय टाइगर परियोजना के बफर क्षेत्र की सीमा, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों की सीम से सटे छोटे भूमिधारक किसानों को वरीयता दी जाएगी।
योजना के माध्यम से बाड़ के लिए धनराशि का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकारी अनुदान के रूप में दिया जाएगा। केवल 10 फीसदी निधि लाभार्थी को भरनी होगी। योजना के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। जिसमें जमीन पर अतिक्रमण न हो, उस जमीन पर कम से कम प्रति हेक्टर 100 पौधे, बांस लगा होना शामिल है। चयनित क्षेत्र वन्य प्राणियों के प्राकृतिक भ्रमण मार्ग में न हो। जिस जमीन पर बाड़ लगानी है, उस जमीन का इस्तेमाल आगामी 10 वर्ष तक बदला नहीं जा सकता। यह प्रस्ताव समिति में मंजूर करना आवश्यक होगा। अनुदान के लिए क्षेत्र की अधिकतम लंबाई 1 हजार मीटर और न्युनतम दस किसानों द्वारा सामुहिक रूप से अनुदान उपलब्ध कराने की विनंति करनी जरूरी होगी।
वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार किसानों से इस योजना का लाभ लेने का अनुरोध किया है। मुनगंटीवार ने कहा कि जंगल से सटे गांवों के लोग ईंधन के लिए लकड़ी, घर बनाने के लिए, खेती के औजार में लकड़ी का उपयोग, पशुओं का चारा, रोजगार जैसी जरूरतों के लिए आज भी जंगल पर निर्भर हैं। जंगल का दायरा सिमटता जा रहा है, जिसके कारण मानव–वन्य जीव के बीच संघर्ष की घटनाएं होती हैं। गांवों के संसाधनों की उत्पादकता और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की गई, तो जंगल की निर्भरता में कमी आने से इस संघर्ष को कम किया जा सकता है।
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