Young Artists

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                                  कला का भविष्य: हमारे ये चार युवा कलाकार  

Pritpal Kaur, 6D Consulting Editor

नई दिल्ली, किसी भी कला प्रदर्शनी को देखने जाना अपने आप में एक अभूतपूर्व अनुभव होता है. ख़ास तौर पर तब जब यह प्रदर्शनी उन युवा प्रतिभाओं की ड्राइंग और पेंटिंग से सजी हो जो खुद अभी विश्विद्यालय में ट्रेनिंग हासिल कर रहे हैं.

ये चार युवा कलाकार नयी संभावनाओं से ओत-प्रोत हैं. साथ ही इन संभावनाओं के चलते जो चुनौतियां उनके सामने आती है, उनका सामना करने को पूरी तरह तत्पर भी. वे इन चुनौतियों का सामना करते हुए ज़िंदगी को बेहतर तरीके से अपनी कला में उकेरते हैं. जिसमें बाज़ार से आने वाली चुनौतियों के साथ-साथ मशीनीकृत दुनिया की मुश्किलें भी मौजूद हैं.

आज का युवा जल्द से जल्द नाम, धन और प्रसिध्दी चाहता है. लेकिन इन चारों युवा प्रतिभाओं में में ऐसी कोई होड़ नहीं दिखाई पड़ती.  इनकी कृतियों में रंगों और आकृतियों का ऐसा संगम देखने  को मिलता है जो धैर्य के साथ, सही वक़्त की तलाश में खुद की पहचान बनाने में दक्षता और मेहनत के साथ लगा हुया है.

भरत जैन कैनवास पर ऐक्रेलिक रंगों से खुद को प्रदर्शित करते हैं. उनकी कला कई राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी है.  यहाँ उनकी कला मशीनों से शांत और कभी मुखर संवाद करती दिखाई पड़ती हैं. हालाँकि टेक्नोलॉजी का नवीनीकरण में बेहद उल्लेखनीय योगदान है लेकिन ऐसा भी होने लगा है कि टेक्नोलॉजी पर हम बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं.  भरत की कला इस सवाल को ऊंची आवाज़ में उठाती है.

बिकाश अपनी कला में प्रकृति, पक्षियों, बादलों, पेड़ों, उनकी जड़ों , पत्तों को परिभाषित करते दिखाई पड़ते हैं. वे इन्हें उकेरने के लिए माइक्रो पेन और काली सियाही के ज़रिये मिनिएचर कलाकृतियाँ बनाते हैं. 

भास्कर ज्योति गोगोई भी पहली बार अपनी कला का प्रदर्शन नहीं कर रहे. उनकी कलाकृतियाँ राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित हो चुकी हैं. उनकी ऐक्रेलिक कला आम आदमी की निराशा और मोह-भ्रम को दर्शाती हैं,  जो उसे उसकी रोज़मर्रा की समस्याओं के चलते होता है. गोगोई की कला ज़िंदगी में होने वाले तनाव से शांति की तलाश में है.  उनकी कलाकृतियाँ अँधेरे से रोशनी की तरफ जाने का रास्ता दिखाती हैं.

बिकाश अपनी कला में प्रकृति, पक्षियों, बादलों, पेड़ों, उनकी जड़ों , पत्तों को परिभाषित करते दिखाई पड़ते हैं. वे इन्हें उकेरने के लिए माइक्रो पेन और काली सियाही के ज़रिये मिनिएचर कलाकृतियाँ बनाते हैं.

हमारी चौथी कलाकार हैं पिंकी कुमारी. उनकी कला में वे सभी नकारात्मक स्थितियां दिखाई देती हैं  जो हमारे समाज में स्त्रियों को कदम-कदम पर झेलनी पड़ती हैं. पिंकी कैनवास पर ऐक्रेलिक रंगों से अपने मन की बात उकेरती हैं. वे अपनी कला के मध्याम से कहती हैं कि आसमान छूने से कोई नहीं रोक सकता.

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