महाराष्ट्र सरकार को बड़ा झटका!

Download PDF

मुंबई, एनआईएजी और महाराष्ट्र सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। बाजार नियामक को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। यह जानकारी आईटी क्षेत्र की कंपनी 63 मून्स की ओर से दी गई है। यह अहम मामला सरकारी एजेंसियों द्वारा डिफॉल्टर कंपनी की 8500 करोड़ की संपत्तियों को अटैच करने से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में एलएलपी खारिज

 इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 63 मून्स कंपनी की ओऱ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी औऱ एनआईएजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पैरवी की थी। आईटी सेक्टर की कंपनी 63 टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने बाजार नियामक को सूचित किया है कि एनएसईएल इंवेस्टर ग्रूप (एनआईएजी) और महाराष्ट्र सरकार की ओर से दाखिल की गई स्पेशल लीव पेटिशन्स (एसएलपी) को सूप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस मामले पर कंपनी के असेट्स को रीलिज करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के ऑर्डर पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। कंपनी के 8500 करोड़ रुपए मूल्य की असेट्स को महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (एमआईपीआईडी) एक्ट के तहत अटैच किया गया था। इस असेट्स को रीलिज करने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पास एनआईएजी ने याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी और एसएलपी को खारिज कर दिया गया है।

63 मून्स की संपत्तियों को अटैच करने के संदर्भ में अप्रैल 2018 में एमआईपीआईडी एक्ट के तहत महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक नोटिस जारी की गई थी। इसके बाद मामला बांबे हाईकोर्ट तक गया। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 24 अक्टूबर को अंतरिम स्टे ऑर्डर पास करते हुए कहा था कि एमपीआईडी अधिनियम के तहत कंपनी की संपत्ति, जिसमें बैंक खाते और अन्य संपत्तियां शामिल थीं। 

हाईकोर्ट ने इसे सरकार का मनमाना कदम और अनुचित बताया। कोर्ट ने ओडीआईएन सॉफ्टवेयर की संपत्तियों को अटैच करने पर स्टे लगा दिया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में पाया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) मुंबई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एनएसईएल की 8,500 करोड़ के मालिकाना हक वाली संपत्तियों को अटैच कर दिया था।जांच एजेंसियों ने डिफॉल्टर कंपनी के साथ ही कंपनी के प्रमोटर्स और पूर्व कर्मचारियों की संपत्तियों को भी नवंबर 2017 में अटैचमेंट की कार्रवाई की थी। डिफॉल्टर्स कंपनी पर 5,600 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज था, जबकि अटैच की गई संपत्तियों की वैल्यू अधिक है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ एनआईएजी और महाराष्ट्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन्स (एसएलपी) दाखिल की गई थी।

Download PDF

Related Post