धारावी पुनर्विकास को विशेष परियोजना का दर्जा 

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मुंबई- एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी कही जानेवाली धारावी के पुनर्विकास का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने धारावी पुनर्विकास को विशेष परियोजना का दर्जा दिया है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके लिए एसपीवी मॉडल पर अमल किया जाएगा।

मॉडल में मुख्य भागीदार का 80 प्रतिशत और राज्य सरकार की 20 फीसदी हिस्सेदारी

 मॉडल में मुख्य भागीदार का 80 प्रतिशत और राज्य सरकार की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। इस निर्णय से मुंबई के व‍िकास को गति मिलेगी साथ ही परियोजना पर अमल को नई गति मिलेगी।           धारावी पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2007-2011 और वर्ष  2016 में मंगाई गई दो निविदा प्रक्रिया की पांच बार समय सीमा बढ़ाई गई थी। बावजूद इसके अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला। इस पृष्ठभूमि पर उंचाई की मर्यादा, व्यापार, औद्योग‍िक गाले, अधिक जनसंख्या, संपत्ति का म‍िश्रण जैसी विभिन्न समस्याओं को मात देने के साथ ही परियोजना को पूरा करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में निवेश आकर्ष‍ित करने की आवश्यकता थी। लिहाजा धारावी के औद्योगिक, व्यवसायिक और झोपड़पट्टीवासियों और फ्लैटधारकों के उचित पुनर्वास के लिए धारावी पुनर्विकास परियोजना को विशेष दर्जा देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। विशेष दर्जा देते समय मुद्रांक शुल्क सहुलियत, जीएसटी, संपत्ति कर में छूट, प्रीमियम शिथिल करना, प्रीमियम माफी इत्यादि में सहुलियत दी गई है।
सेक्टर 1 से 5 को एकत्रित करके धारावी पुनर्विकास परियोजना को एकात्मिक मास्टर प्लान विकसित किया जाएगा। इसके लिए वैश्विक टेंडर मंगाने की मंजूरी दी गई है। इसीतरह परियोजना के दायरे से बाहर  माटुंगा-दादर स्थित करीब 90 एकड़ रेलवे की जमीन और आस-पास की 6.91 हेक्टेयर जमीन धारावी पुनर्विकास परियोजना में समाहित की जाएगी। एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, धारावी पुनर्विकास परियोजना के सीईओ और विशेष कार्य अधिकारी को अन्य मसलों के निराकरण के अधिकार दिए गए हैं।  इसके अलावा मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।
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