कलाकृति बनाने के लिए रसोई के सामानों का प्रयोग करते हैं सीरज!

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Pritpal Kaur, 6D Consulting Editor

नई दिल्ली, प्रसिद्ध पेंटेर सीरज सक्सेना अपनी कला प्रारूप के लिए अपनी माँ, माँ और बहन की दोस्तों और पड़ोसी महिलाओं को श्रेय देते हैं। उन्होंने बताया कि वो रसोई के समान जैसे बेलन, चिमटा, चम्मच, गुज़िया बनाने का साँचा आदी इत्यादि का प्रयोग कलाकृति बनाने में करते हैं ख़ासतौर ओर टेरकोटा की कलाकृतियों में।

सीरज ने बताया की उनके पिता के कलामर्मज्ञ होने के बावजूद पेंटिंग में उनकी रुचि बहुत देरी से से हुई। वे ग्यारहवीं में थे जब अचानक पेंटिंग की शुरुआत हुई। फिर उन्होंने पलट के नहीं देख। सीरज अपनी कला प्रारूप के लिए अपनी माँ, माँ और बहन की दोस्त और पड़ोसी महिलाओं को श्रेय देते हैं। उन्होंने बताया कि वो चौके के समान जैसे बेलन, चिमटा, चम्मच, गुज़िया बनाने का साँचा आदी इत्यादि का प्रयोग कलाकृति बनाने में करते हैं ख़ासतौर ओर टेरकोटा की कलाकृतियों में।

सीरज ने देश के वर्तमान हालात पर असंतोष जताते हुए कहा कि आज किसी को गांधी जी के सिद्धांतो से कोई लेना देना नहीं है। कलाकार को स्वच्छंद कार्य करने या अभिव्यकती की स्वतंत्रता नहीं है। सीरज 6D न्यूज़ की सलाहकार सम्पादक प्रितपाल कौर के  साथ एक साक्षात्कार के दौरान कहा की अब मैंने भी आँखे बंद कर लीं हैं। किसी को कुछ नहीं पड़ी है।

परिचय: सीरज सक्सेना एक ऐसे कलाकार है जो सिरेमिक, वस्त्र, पेंटिंग, लकड़ी और ग्राफिक कला जैसे विभिन्न माध्यमों में काम करना पसंद करते हैं। उन्होंने इंदौर स्कूल ऑफ आर्ट्स से कला की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें बाइक की सवारी भी पसंद है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद अब दिल्ली और एनसीआर की सड़कों पर अक्सर देखा जा सकता है। उन्हें यात्रा पसंद है और वो हर साल यूरोप की यात्रा पर जाते हैं अंतर्राष्ट्रीय कला सेमिनार, कलाकारों के घरों और प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए. अभी तक उन्होंने भारत और विदेशों में 26 एकल प्रदर्शनियों और 180 से अधिक समूह प्रदर्शनियों में भाग लिया। उन्होंने देश विदेश में कई स्थानों पर आर्ट इंस्टालेशन किये हैं इनमें साई, पीटीआई, राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय नई दिल्ली और अर्बोटेम बॉटनिकल गार्डन पोलैंड शामिल हैं. पिछले सात सालों से वन वेलनेस रिट्रीट, देहरादून से एक कलाकार के रूप में जुड़े हुए हैं.। उन्होंने वन के लिए 300 से अधिक कलाकृतियां बनायी हैं। वह विशेष रूप से हमारे देश में आदिवासी क्षेत्रों की यात्रा करना पसंद करते हैं। हाल ही में कवि (पीयूष दाहिया) से संवाद पर आधारित उनकी पुस्तक प्रकाशित हुई थी। जल्दी ही उनकी दो किताबें जिनमें से एक यात्रा वृत्तांत है और दूसरी काव्य संग्रह है, प्रकाशित होने जा रही हैं। वरिष्ठ कवि श्री अशोक वाजपेयी द्वारा लिखी गयी कविताओं पर आधारित पेंटिंग भी की है. अशोक वाजपेयी की प्रेम कविताओं और खजुराहो की मूर्तियों के स्केच पर आधारित कॉफी टेबल बुक अगले साल की शुरुआत तक प्रकाशित हो जाएंगी।

 

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