कांग्रेस ने चला तुरुप का पत्ता, प्रियंका बनीं महासचिव

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नयी दिल्ली, कांग्रेस ने 2019 के चुनावों के मद्देनज़र अंततः अपना तुरूप का पत्ता चुनावी मैदान में चला ही दिया. प्रियंका गांधी अंततः सक्रिय राजनीति में आ ही गयीं. प्रियंका के महासचिव बनने और आगामी चुनावों में उनका प्रभाव क्या होगा ये भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाओं से ही लगाया जा सकता है. प्रियंका गांधी वाड्रा की नियुक्ति की परोक्ष चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अन्य के मामलों में परिवार ही पार्टी है जबकि भाजपा के लिए पार्टी ही परिवार है।

राहुल ने सौंपी उत्तर प्रदेश-पूर्व की जिम्मेदारी, सिंधिया भी बने महासचिव

वर्षों से जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए गांधी परिवार की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को औपचारिक रुप से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी महासचिव नियुक्त किया एवं उत्तर प्रदेश-पूर्व की जिम्मेदारी सौंपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी लोकसभा सीट और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूर्व गोरखपुर संसदीय सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं।

आम चुनाव से पहले राज्य में पूरी तरह कमर कसके उतरने की कांग्रेस की मंशा के बीच प्रियंका की नियुक्ति से तत्काल राजनीतिक चर्चा शुरु हो गयी। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह कहते हुए इस कदम का स्वागत किया कि वह पार्टी के लिए बहुत बड़ी सफलता होंगी जबकि भाजपा ने सक्रिय राजनीति में उनके उतरने को कांग्रेस द्वारा यह कबूल लेना बताया कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी नेतृत्व देने में विफल हुए हैं।

पार्टी के एक बयान के अनुसार प्रियंका गांधी फरवरी के पहले हफ्ते में अपनी नयी जिम्मेदारी संभालेंगी। 47 वर्षीय नेता मुख्य हिंदीभाषी राज्य उत्तर प्रदेश में अपने भाई राहुल की मदद करेंगी जो 1980 के दशक के मध्य तक पार्टी का मजबूत गढ़ रहा था।राहुल ने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि मेरी बहन प्रियंका लोकसभा चुनव में उत्तर प्रदेश में मेरी मदद करेंगी, वह बहुत काबिल हैं। गुजरात हो या उत्तर प्रदेश, हम फ्रंट फुट पर खेलेंगे। ’’ उन्होंने अमेठी में कहा,‘‘मैं महसूस करता हूं कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश में एक नयी सोच के पनपने में मदद मिलेगी और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव आएगा।’’ 

गांधी ने बाद में ट्वीट किया, ‘‘उत्तर प्रदेश आशा से ओतप्रोत और सहृदय भारत के निर्माण में केंद्रबिंदु है। प्रियंका और ज्योतिरादित्य की अगुवाई वाली उप्र कांग्रेस की नयी टीम से राज्य में नयी तरह की राजनीति का सवेरा होगा। हम उत्तर प्रदेश को बदलने में युवाओं को बेहतरीन मंच प्रदान करेंगे।’’ 

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रियंका गांधी की पार्टी महासचिव के रुप में नियुक्ति पर हैदराबाद में कहा, ‘‘यह एक अच्छी बात है। समय से राहुल गांधीजी ने कदम उठाया…हम सभी हृदय से स्वागत करते है और हम उन्हें (प्रियंका गांधी को) आरएसएस और भाजपा का सफाया करने में पूरा सहयोग करेंगे।’’ प्रियंका गांधी वाड्रा की नियुक्ति की परोक्ष चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अन्य के मामलों में परिवार ही पार्टी है जबकि भाजपा के लिए पार्टी ही परिवार है। महाराष्ट्र के बारामती, गढ़चिरौली, हिंगोली, नांदेड़ और नंदूरबार के बूथस्तर के भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा पर फैसले किसी व्यक्ति या परिवार की इच्छाओं के आधार पर नहीं लिये जाते।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि प्रस्तावित महागठबंधन में विभिन्न दलों से ‘खारिज’ किये जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘पारिवारिक बैसाखी’ का सहारा लिया है। अन्य भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस की हार आसन्न है और प्रियंका के आने से वह टल नहीं सकती है।

अब तक राजनीति में प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में अपने परिवार के सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार अभियान तक सीमित थीं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की अटकलें हैं कि गांधी परिवार की सक्रिय राजनीति की विरासत रहीं प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र राय बरेली से चुनाव लड़ सकती हैं।

कांग्रेस में कई लोगों का कहना है कि उनके राजनीति में उतरने से राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं में बहुत ही जरुरी उत्साह का संचार होगा जहां पिछले कई सालों में कांग्रेस का प्रभाव घटता जा रहा था और समाजवादी पार्टी (सपा) एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा)ने गठजोड़ की घोषणा की है। कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि प्रियंका भीड़ खासकर युवाओं को कांग्रेस की ओर खींचने में मदद पहुंचाएगी और अगड़ी जातियां एवं अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के पाले में आएंगे जिससे बसपा-सपा गठबंधन भी कांग्रेस के साथ तालमेल कायम करने के लिए बाध्य होगा।

राहुल गांधी ने कहा कि उनकी सपा या बसपा से कोई दुश्मनी नहीं है । उन्होंने कहा, ‘‘हम जहां कहीं भी भाजपा को पराजित करने के लिए साथ काम कर सकते हैं, हम करेंगे….. लेकिन हमारा काम कांग्रेस के लिए जगह बनाना है और उसके लिए हमने एक बड़ा कदम उठाया है।’’ 

राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी महासचिव नियुक्त किया है और उन्हें प्रभारी (उत्तर प्रदेश-पश्चिम) भी बनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य की 80 सीटों की जिम्मेदारी सिंधिया और प्रियंका गांधी के कंधों पर मोटे तौर पर आधी आधी बांटी गयी है यानी उन्हें 40 -40 सीटों का जिम्मा सौंपा गया है।

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