शिवसेना धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा नहीं- एनसीपी   

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मुंबई- एनसीपी के महासचिव डीपी त्रिपाठी ने शिवसेना का पक्ष लेकर राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है कि शिवसेना धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा नहीं है। त्रिपाठी के इस बयान से वर्ष 2019 के चुनाव में एनसीपी और शिवसेना के बीच गठजोड़ की संभावनाओं की नजर से देखा जाने लगा है।
राजनीति में सभी तरह की संभावनाएं हैं।  भाजपा और शिवसेना के बीच मतभेद हैं। उनका मानना है कि महाराष्ट्र में शिवसेना धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा नहीं है- त्रिपाठी
पार्टी प्रदेश मुख्यालय नें प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि शिवसेना अपनी सहयोगी पार्टी से नाराज है। लिहाजा शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। शिवसेना को विपक्षी खेमे में शामिल करने के सवाल पर त्रिपाठी ने कहा कि राजनीति में सभी तरह की संभावनाएं हैं।  भाजपा और शिवसेना के बीच मतभेद हैं। उनका मानना है कि महाराष्ट्र में शिवसेना धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा नहीं है। त्रिपाठी ने चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन का नेता बताने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि जनता चुनाव में नेता का चयन करेगी। विपक्ष का गठबंधन मुद्दों पर आधारित होगा। चुनाव से पहले किसी को विपक्ष के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करना सही नहीं होगा। कांग्रेस से चुनावी गठजोड़ करने के सवाल पर त्रिपाठी ने कहा कि इस बारे में जल्द फैसला लिया जाएगा। महाराष्ट्र में वर्ष 2014 के चुनाव में हमने बराबर सीट बंटवारे का प्रस्ताव दिया था। दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। हमें विधानसभा में 41 और कांग्रेस को 42 सीटें मिलीं। लोकसभा में एनसीपी को 4 और कांग्रेस को 2 सीट मिल सकी। हालांकि आगामी चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन के मुद्दे पर त्रिपाठी ने चुप्पी साध ली।
त्रिपाठी ने कहा कि बनारस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विपक्ष को सर्वमान्य उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए। एनसीपी मुखिया शरद पवार को अगले चुनाव में मोदी के खिलाफ प्रधानमंत्री पद के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाने के बारे में त्रिपाठी ने कहा कि संसद में एनसीपी का संख्याबल कम है। लिहाजा इस संबंध में अभी हम कोई दावा नहीं कर सकते। उन्होंने बताया की कर्नाटक में एनसीपी चुनाव नहीं लड़ेगी। एनसीपी ने भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है।
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