सीएम के आदेश पर हुआ श्रीदेवी का  सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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मुंबई- फिल्म अभिनेत्री अम्मा यंगर अय्यपन उर्फ श्रीदेवी का दुबई में निधन होने के बाद उनका मुंबई में सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। श्रीदेवी का अंतिम संस्कार सरकारी सम्मान के साथ किए जाने पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार श्रीदेवी का अंतिम संस्कार सरकारी सम्मान के साथ किए जाने का आदेश  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया था। मुख्यमंत्री को यैसे मामले में निर्णय लेने का संवैधानिक अधिकार है। 
दिवंगत श्रीदेवी का अंतिम संस्कार सरकारी सम्मान के साथ करने का आदेश दिनांक 25 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी किया गया था। इस संबंध में 6 फरवरी 2018 को सरकारी पत्र के अनुसार कार्यवाही करने का निर्देश मुंबई उपनगर जिलाधिकारी और मुंबई पुलिस आयुक्त को सूचित किया गया था।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 22 जून 2012 से 26 मार्च 2018 तक महाराष्ट्र में 40 व्यक्तियों का सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया है। दिवंगत श्रीदेवी का अंतिम संस्कार सरकारी सम्मान के साथ करने का आदेश दिनांक 25 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी किया गया था। इस संबंध में 6 फरवरी 2018 को सरकारी पत्र के अनुसार कार्यवाही करने का निर्देश मुंबई उपनगर जिलाधिकारी और मुंबई पुलिस आयुक्त को सूचित किया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार के राज शिष्टाचार विभाग से सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। 
 
गलगली के मुताबिक श्रीदेवी की मौत के बाद जब उनका सरकारी सम्मान में अंतिम संस्कार किया गया तो कई सवाल उठे थे। तब चर्चा थी कि श्रीदेवी पद्मश्री से सम्मानित थी, इसिलए उनका सरकारी सम्मान में अंतिम संस्कार किया गया। याद दिला दें कि मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क में आयोजित गुढ़ी पाड़वा की रैली में श्रीदेवी के का अतंम संस्कार सरकारी सम्मान के साथ किए जाने पर आपत्ति जताई थी। सूचना अधिकार से मिली जानकारी में साफ हुआ है कि मुख्यमंत्री को इसतरह के मामलों में आदेश देने का अधिकार है। 
 
दिनांक 22 जून 2012 से दिनांक 26 मार्च 2018 तक कुल 40 मान्यवरों का अंतिम संस्कार सरकारी सम्मान में किया गया था। इसमें श्रीदेवी के अलावा श्रीमती मृणाल गोरे, पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, पूर्व मंत्री प्रभाकर कुंटे, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष कृष्णराव देसाई ऊर्फ बाबासाहेब कुपेकर, पूर्व राज्यमंत्री शंकरराव देवराम काले, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे, पूर्व राज्यमंत्री लक्ष्मण रंगनाथ हातनकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शंकरराव जगताप, पूर्व सांसद दिनकर बालू पाटिल, पूर्व राज्यमंत्री सहकार महर्षी छत्रपाल उर्फ बाबासाहेब आनंदराव केदार, पूर्व नायब राज्यपाल (पांडेचरी) रजनी रॉय, विपश्यना गुरु सत्यनारायण गोएंका, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहन धारिया, पूर्व मंत्री सुभाष झनक, बोहरा धर्मगुरु सय्यदना मोहम्मद बुऱ्हानुद्दीन, पूर्व विधायक दत्तात्रय नारायण पाटिल, पूर्व मुख्यमंत्री एआर अंतुले,  पूर्व उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल, पूर्व मंत्री गोविंदराव वामनराव आदिक,  पूर्व राज्यपाल (मणिपुर) डॉ. सय्यद अहमद, पूर्व नायब राज्यपाल (अंदमान व निकोबार) रामभाऊ कापसे, पूर्व कॅबिनेट मंत्री मदन विश्वनाथ पाटिल, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष प्रमोदबाबू भाऊरावजी शेंडे का नाम शामिल है। 
 
इसीतरह  पूर्व सांसद शरद जोशी, वरिष्ठ कवीवर्य मंगेश पाडगावकर, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ.दौलतराव आहेर, जैन इरिगेशन समूह के संस्थापक डॉ. भवरलाल जैन, पूर्व मंत्री निहाल मौलवी मो. उस्मान अहमद, पूर्व सांसद नामदेव ऊर्फ बापूसाहेब थिटे, पूर्व समाज कल्याण मंत्री बाबूराव महादेव भारस्कर, मातंग समाज के नेता मनोहर ऊर्फ बाबासाहेब गोपले, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीमती जयवंतीबेन मेहता, पूर्व वित्त मंत्री मधुकरराव किंमतकर, विधान परिषद के पूर्व सभापति वसंत डावखरे, विधान परिषद के पूर्व सभापति प्रा. नारायण सदाशिव फरांदे, लोकसभा सदस्य ॲड. चिंतामण वनगा, वरिष्ठ पत्रकार मुजफ्फर हुसेन, पद्मविभूषण डॉ. बीके गोयल और पूर्व मंत्री डॉ. पतंगराव कदम का नाम शामिल है। 
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