गेटवे ऑफ़ इंडिया को संरक्षित करेंगे दो संघठन

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मुंबई। गेटवे ऑफ इंडिया को डिजिटल तरीके से संरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन सीआर्क के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इस स्मारक की डिजिटल स्कैनिंग और संग्रहण का काम इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ है। स्थलीय गतिविधियों से प्राप्त आंकड़ों और छवियों को छात्रों, पर्यटकों और सांस्कृतिक विरासत के चाहनेवालों के लिए फोटो-रियल 3डी मॉडल में बदल दिया गया है। 
स्मारक की डिजिटल स्कैनिंग और संग्रहण के काम की शुरुआत
वर्ष 1911 में किंग जॉर्ज वी और क्वीन मैरी के इस शहर में आने की याद में बनाया गया, गेटवे ऑफ इंडिया भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का एक प्रतीक है।  यह वर्ष 1924 में बनकर तैयार हुआ। लगभग एक सदी के दौरान मुंबई में हुए विकास का साक्षी है।  इसके पांच सितारा ताज महल पैलेस होटल के नज़दीक होने की वजह से यह देश का पहला ऐसा भवन है, जिसे अपने वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण प्राप्त हुआ है।

यह स्मारक अब बॉम्बे के रूप में इस शहर के समृद्ध औपनिवेशिक इतिहास की याद दिलाता ह, और शहर की एक अनौपचारिक पहचान है। वर्ष 2003 के बाद से, सीआर्क ने वियतनाम के ह्यू स्मारकों के परिसर में टुडुक मकबरा और एन डिंह पैलेस, थाईलैंड में वाटफ्रा सी सैन फेट, कंबोडिया में अंगकोर वाट, म्यांमार में बागान और ऑस्ट्रेलिया में सिडनी ओपेरा हाउस सहित 40 देशों के 200 से अधिक विरासत स्थलों के उच्च-तकनीकी डिजिटल रिकार्डों को एकत्रित किया गया है।

सीगेट टेक्नोलॉजी के एशिया प्रशांत विपणन के उपाध्यक्ष रॉबर्ट यांग के मुताबिक  विरासत स्थल मानवता की सामूहिक यादगार का एक अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन उनमें से कईयों को समय के प्रकोपों से खतरा होता है। भारत में सांस्कृतिक संरक्षण के अपने इस महत्त्वपूर्ण सफ़र में शामिल होने के लिए सीआर्क के साथ अपनी साझेदारी को लेकर हम खुश हैं।
वर्तमान और भविष्य के आंकड़े के महत्त्व हम विश्वास रखते हैं। हमने वर्ष 2015 से दुनिया के कुछ सबसे अनोखे और ऐतिहासिक तौर पर महत्त्वपूर्ण स्थानों को डिजिटल रूप से संरक्षित करने के लिए मिलकर काम किया है। सीआर्क को आंकड़ों के भंडारण के बेहतरीन समाधान प्रदान करना हमारी प्रतिबद्धता है, ताकि वे तस्वीरें लेने और प्रसंस्करण से लेकर संग्रहण तक वे किसी परियोजना में एकत्रित किए जाने वाले आंकड़ों को सुरक्षित तरीके से भंडारित कर सकें। 
 
पुरातत्व और संग्रहालय (महाराष्ट्र सरकार निदेशालय) के निदेशक डॉ. तेजस गारगे ने बताया कि सीआर्क ने अपने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत ड्रोन से किये गए हवाई सर्वेक्षणों, लिडार नामक स्थलीय लेजर स्कैनिंग के साथ और फोटोग्रामेट्री गतिविधियों के माध्यम से डिजिटल संरक्षण के लिए गेटवे ऑफ़ इंडिया को चुना था ।
भविष्य में इसकी स्थिति में होनेवाले किसी भी परिवर्तन के लिए इस स्मारक की सतह पर नज़र रखने के आधार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने हेतु सीआर्क 3डी मॉडल और वास्तुकला के चित्र मुहैया कराएगी। प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ़ इंडिया की 3डी स्कैनिंग की प्रस्तावित परियोजना, इस स्मारक के एक सुगमता से प्राप्त किए जानेवाला डिजिटल डेटाबेस को बनाने, इसकी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यापक संरक्षण नीतियों के निर्माण के लिए वास्तव में लाभकारी है।
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