म्हाडा रहिवासियों का स्थाई पुनर्वास

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने म्हाडा के ट्रांजिट कैंपों में रहनेवालों को बड़ी राहत दी है। रहिवासियों का ट्रांजिट कैंपों में ही स्थाई पुनर्वास किया जाएगा। इस प्रस्ताव को सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृित प्रदान की गई। साथ ही यह भी निर्णय है कि ट्रांजिट कैंपों के गालों में अवैध तरीके से घुसखोरी के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदारी सुनिश्चित कर उनके खिलाफ प्रचलित नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

ट्रांजिट कैंप बनेगा ‘परमानेंट ऐड्रेस

जहां ट्रांजिट कैंपों के पुनर्वास का काम शुरू है अथवा शुरू किया जाना है, उन स्थानों पर कैबिनेट के फैसले पर अमल किया जाएगा। मुंबई शहर में म्हाडा के कुल 56 ट्रांजिट कैंप हैं। इसमें 21 हजार 135 गाले हैं। राज्य सरकार के अधीन मुंबई इमारत मरम्मत व पुनर्रचना मंडल का वर्ष 1977 में म्हाडा में विलय किया गया था। मंडल की ओर से की गई जांच में पाया गया था कि जुलाई 2013 अखिर तक ट्रांजिट कैंप के 8 हजार 448 गालों में अपात्र अथवा अनधिकृत रहिवासी रह रहे हैं।  इनमें से कुछ निवासी 40 साल से अधिक समय से वहां रह रहे हैं।  कैंपों में अधिकृत, अपात्र व अनधिकृत रहिवासियों के निवास तथा अन्य मसलों का हल निकालने के लिए म्हाडा ट्राजिंट कैंपों के पुनर्विकास का काम शुरू है। कुछ का काम शुरू होना है। एेसे स्थानों पर  उनका स्थाई पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए तीन प्रकार की वर्गवारी करके पुनर्विकसित होनेवाले ट्रांजिट कैंपों में निवासियों का स्थाई पुनर्वास करने का निर्णय है। 

ट्रांजिट कैंपों में स्थनांतरित मूल निवासियों को उसी स्थान पर पुनर्निर्मित इमारत में गाला देना आवश्यक है। इसके तहत प्रस्तावित पुनर्निर्मित इमारत में उसी स्थान पर गाला स्वीकार करने अथवा वहां का मालिकाना अधिकार छोड़ने के अधीन रहते हुए उनका ट्रांजिट कैंप में पुनर्वास करने का फैसला है। एेसे रहिवासियों का पुनर्वास मुफ्त होगा। हालांकि मुंबई मरम्मत मंडल के गालाधारकों को दिए जा रहे किराए व  रखरखाव शुल्क में कोई छूट नहीं होगी। साथ ही उन्हें सभी प्रकार की देनदारियों का भुगतान म्हाडा प्राधिकरण को करना होगा। उन्हें भविष्य में पुनर्वासित नए फ्लैट के लिए मासिक शुल्क भी देना होगा।  वित्तीय मुआवजा देकर पावर ऑफ अटॉर्नी या इस तरह के दस्तावेज के आधार पर मूल निवासियों से अनियमित अथवा अवैध तरीके से अधिकार लेकर कुछ लोग ट्रांजिट कैंपों में रह रहे हैं। इस तरह का लेनदेन अवैध है, फिर भी उनके प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार किया गया है। वर्तमान में रह रहे लोंगों को निर्माण लागत व मूलभूत सुविधा का भुगतान करना होगा।  

जरूरतमंदों की मुफ्त नेत्र सर्जरी  

राज्य सरकार ने चैरिटी नेत्र अस्पतालों अथवा मेडिकल केंद्रों में मोतिया बिंद अथवा आंख की अन्य बीमारी से परेशान जरूरतमंदों की मुफ्त व रियायती दर पर सर्जरी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम में संशोधन करने का निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

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